Summer express, चंडीगढ़। प्रदेश में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा के कई शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बेहद खराब से गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है। खासकर औद्योगिक क्षेत्रों और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से सटे इलाकों में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हवा में धूल और धुएं के सूक्ष्म कणों की अधिकता के कारण स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ गए हैं।
मानेसर के नजदीक स्थित पंचगांव में 24 घंटे का औसत AQI 406 दर्ज किया गया है। इस आंकड़े के साथ पंचगांव हरियाणा का सबसे प्रदूषित क्षेत्र बन गया है। देशभर में भी यह उत्तर प्रदेश के गजरौला के बाद दूसरे स्थान पर रहा, जहां AQI 407 दर्ज किया गया। पंचगांव उन चुनिंदा स्थानों में शामिल है जहां वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में पहुंच चुकी है।
प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों में भी प्रदूषण का स्तर काफी अधिक दर्ज किया गया। मानेसर में AQI 343, बहादुरगढ़ में 342, गुरुग्राम में 331, हिसार में 327, बल्लभगढ़ में 316 और फरीदाबाद में 303 दर्ज किया गया। इन सभी शहरों में हवा बहुत खराब श्रेणी में बनी हुई है।
इसके अलावा रोहतक में AQI 294, कुरुक्षेत्र में 289, सोनीपत में 277, अंबाला में 271 और जींद में 268 दर्ज किया गया। इन शहरों में वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में है। दूसरी ओर पंचकूला और पलवल के लोगों को अपेक्षाकृत राहत मिली है। पंचकूला में AQI 68 और पलवल में 98 दर्ज किया गया, जो संतोषजनक श्रेणी में आता है।
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. मदन खीचड़ के अनुसार, प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं में कमी आने के बावजूद मौसम की परिस्थितियों के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। उत्तर-पश्चिमी हवाओं की रफ्तार धीमी होने और रात के तापमान में गिरावट के चलते वातावरण में मौजूद धूल और धुएं के कण एक जगह जमा हो रहे हैं। हवा में नमी बढ़ने के कारण इन कणों का फैलाव भी प्रभावित हो रहा है, जिससे कई इलाकों में स्मॉग की स्थिति बनी हुई है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 10 नवंबर तक प्रदेश में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने की संभावना है। इस दौरान उत्तर-पश्चिमी हवाएं हल्की से मध्यम गति से चल सकती हैं। रात के तापमान में कुछ गिरावट और दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
मौसम विभाग ने 14 नवंबर के आसपास प्रदेश में बारिश की संभावना जताई है। यदि बारिश होती है तो वातावरण में मौजूद प्रदूषण के कुछ कण नीचे बैठ सकते हैं, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार होने और लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, प्रदूषण के स्तर में वास्तविक सुधार मौसम की परिस्थितियों और अन्य स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन पर भी निर्भर करेगा।