Summer express, नई दिल्ली | अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है, लेकिन इस वैश्विक संकट के बीच मध्य अमेरिका का छोटा देश पनामा आर्थिक रूप से बड़ा लाभ कमा रहा है। पनामा नहर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिससे वहां की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है।
पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिर स्थिति के कारण तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। ऐसे में शिपिंग कंपनियां सुरक्षित और वैकल्पिक मार्गों की तलाश में पनामा नहर का उपयोग कर रही हैं, जिससे वहां जहाजों की आवाजाही काफी बढ़ गई है।
स्थिति यह है कि नहर से गुजरने के लिए अब कंपनियों को बोली प्रक्रिया का सहारा लेना पड़ रहा है। अधिक बोली लगाने वाले जहाजों को पहले रास्ता दिया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, एक जहाज को प्राथमिकता देने के लिए कंपनियां करीब 4 मिलियन डॉलर यानी लगभग 37 करोड़ रुपये तक खर्च कर रही हैं, जबकि सामान्य शुल्क इससे कहीं कम होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्री मार्गों में अनिश्चितता के कारण वैश्विक आपूर्ति प्रणाली प्रभावित हुई है। पनामा नहर को सुरक्षित विकल्प मानते हुए कंपनियां इसका उपयोग बढ़ा रही हैं, लेकिन इससे परिवहन लागत और समय दोनों बढ़ रहे हैं।
पनामा नहर प्राधिकरण के अनुसार, बढ़ती मांग और नीलामी प्रणाली के चलते सरकार की आय में बड़ा उछाल आया है। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में पनामा अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और उसे इसका सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है।