अध्ययन परमिट पर सीमा और आव्रजन नीति में सख्ती से बढ़ी चुनौती
समर न्यूज | चंडीगढ़
कनाडा में पढ़ाई का सपना देख रहे पंजाब के विद्यार्थियों के लिए रास्ता पहले की तुलना में महंगा और कठिन हो गया है। एक सितंबर से कनाडा ने अध्ययन परमिट के लिए वित्तीय क्षमता दिखाने की न्यूनतम सीमा बढ़ाकर अकेले विद्यार्थी
के लिए 23,448 कनाडाई डॉलर कर दी है।
यह राशि ट्यूशन फीस और कनाडा आने-जाने के खर्च से अलग है। पहले यह सीमा 22,895 डॉलर थी। कनाडा सरकार के अनुसार, इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी विद्यार्थी पढ़ाई के दौरान अपने रहने का खर्च उठा सकें और आर्थिक कठिनाई में न फंसें। पंजाब के विद्यार्थियों पर इसका असर अपेक्षाकृत अधिक पड़ सकता है, क्योंकि कनाडा लंबे समय से राज्य के युवाओं के लिए प्रमुख विदेशी शिक्षा और रोजगार गंतव्य रहा है। बढ़ती फीस, रहने का खर्च, मुद्रा विनिमय दर और अब अधिक वित्तीय प्रमाण की जरूरत से परिवारों पर शुरुआती आर्थिक बोझ बढ़ेगा। साथ ही, विद्यार्थियों को केवल पैसा दिखाना ही पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें मान्य शिक्षण संस्थान में प्रवेश, आवश्यक प्रांतीय या क्षेत्रीय सत्यापन पत्र और अध्ययन के लिए वास्तविक उद्देश्य भी साबित करना होगा।
परमिट पर भी लगाम
कनाडा ने विदेशी विद्यार्थियों की संख्या नियंत्रित करने के लिए 2024 में अधिकांश अध्ययन परमिट आवेदनों पर सीमा लागू की थी। 2026 के लिए नए विद्यार्थियों का लक्ष्य घटाकर 1.55 लाख किया गया है। सरकार के अनुसार 2025 में नए विद्यार्थियों का आगमन निर्धारित लक्ष्य से 62 प्रतिशत कम रहा। इससे साफ है कि कनाडा अब बड़ी संख्या में विदेशी विद्यार्थियों के बजाय सीमित संख्या में आर्थिक रूप से सक्षम और वास्तविक विद्यार्थियों को प्राथमिकता दे रहा है। इस बदलाव के साथ प्रांतीय आवंटन और अध्ययन संस्थानों की क्षमता भी महत्वपूर्ण हो गई है। कई आवेदकों को अध्ययन परमिट के लिए प्रांतीय या क्षेत्रीय सत्यापन पत्र की जरूरत पड़ती है।
कानूनी विकल्पों को प्राथमिकता देनी होगी
कनाडा की सख्त नीति से पंजाब के विद्यार्थियों का रुख ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों की ओर बढ़ सकता है। हालांकि इन देशों में भी वीजा, फीस और रोजगार से जुड़े नियम लगातार बदल रहे हैं। इसलिए केवल देश बदलना समाधान नहीं होगा; विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की उपयोगिता, कुल लागत और पढ़ाई के बाद कानूनी विकल्पों को प्राथमिकता देनी होगी। कनाडा की नीति का असर केवल विद्यार्थियों पर नहीं पड़ेगा। पंजाब में शिक्षा सलाहकारों, यात्रा कारोबार, विदेशी शिक्षा से जुड़े वित्तीय कारोबार और परिवारों के खर्च पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले महीनों में यदि कनाडा अध्ययन परमिट की संख्या और आव्रजन लक्ष्यों को और सीमित करता है तो पंजाब से कनाडा जाने वाले विद्यार्थियों की संख्या में और कमी आ सकती है।
पंजाब के लिए बदलता विकल्प
पंजाब के विद्यार्थियों के लिए इसका अर्थ यह है कि कनाडा जाने से पहले पाठ्यक्रम, संस्थान, कुल खर्च और भविष्य की रोजगार संभावनाओं का अधिक सावधानी से आकलन करना होगा। केवल विदेश जाने और बाद में काम के जरिए खर्च निकालने की योजना पहले जितनी आसान नहीं रहेगी। कनाडा की सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि विद्यार्थी को आवेदन के समय यह साबित करना होगा कि वह कनाडा में काम किए बिना अपनी पढ़ाई और रहने का खर्च उठा सकता है।