Summer express/मंडी, धर्मवीर-: आईआईटी मंडी परिसर में जन्माष्टमी कार्यक्रम के दौरान लगाए गए एक पोस्टर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पोस्टर में भगवद्गीता के संदर्भ में समाज के चार वर्गों—ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र—की भूमिकाओं का उल्लेख किया गया है। इसमें शूद्र वर्ग की भूमिका को ‘उच्च वर्गों की सेवा’ से जोड़ने पर सवाल उठाए गए हैं। मामले को लेकर संस्थान ने जांच के लिए एक समिति गठित कर दी है।
‘भगवद्गीता- द टाइमलेस विजडम’ शीर्षक से लगाया गया था पोस्टर
विवादित पोस्टर आईआईटी मंडी के ऑडिटोरियम के बाहर जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान लगाया गया था। पोस्टर का शीर्षक ‘भगवद्गीता- द टाइमलेस विजडम’ था। इसमें तस्वीरों और लिखित सामग्री के माध्यम से चारों वर्गों की अलग-अलग भूमिकाएं बताई गई थीं।पोस्टर में ब्राह्मणों की भूमिका ईश्वर का संदेश फैलाने, क्षत्रियों की समाज और आध्यात्मिकता की रक्षा करने तथा वैश्यों की भूमिका अर्थव्यवस्था चलाने और दूसरों की मदद करने से जोड़ी गई थी। वहीं, शूद्रों की भूमिका उच्च वर्गों की सेवा करने के रूप में दर्शाई गई थी। इसी हिस्से को लेकर जातिगत टिप्पणी के आरोप लगाए जा रहे हैं। पोस्टर में भगवद्गीता के दो श्लोकों का भी उल्लेख किया गया था।
छात्रों के कार्यक्रम का हिस्सा था पोस्टर
आईआईटी मंडी ने स्पष्ट किया है कि जन्माष्टमी समारोह संस्थान का आधिकारिक कार्यक्रम नहीं था। यह कार्यक्रम छात्रों की ओर से आयोजित किया गया था और संस्थान ने इसे आधिकारिक तौर पर प्रायोजित या समर्थन नहीं किया था।विवाद सामने आने के बाद गठित जांच समिति यह पता लगाएगी कि पोस्टर किसने तैयार किया और इसे परिसर में लगाने की अनुमति किस स्तर से मिली। समिति पोस्टर तैयार करने के पीछे की मंशा और पूरे घटनाक्रम से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर संस्थान आगे की कार्रवाई करेगा।
जांच कमेटी में विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधि शामिल
संस्थान की ओर से गठित समिति में फैकल्टी सदस्यों के अलावा विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। इसमें अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधियों को भी जगह दी गई है। समिति की रिपोर्ट के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
आईआईटी मंडी बोला- ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं
आईआईटी मंडी के रजिस्ट्रार डॉ. केएस पांडेय ने कहा कि संस्थान इस तरह के पोस्टर या गतिविधियों का किसी भी सूरत में समर्थन नहीं करता। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में संस्थान की निर्धारित नीतियों के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।वहीं, आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि पोस्टर छात्रों की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि कुछ छात्रों ने भगवद्गीता की अपने तरीके से व्याख्या की है। उनके अनुसार, आईआईटी मंडी समानता, सामाजिक न्याय, वैज्ञानिक सोच और संविधान में निहित मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
पहले भी बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं निदेशक
आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा इससे पहले भी अपने बयानों और गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहे हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने छात्रों से मांस का सेवन नहीं करने का संकल्प लेने की अपील की थी। इसी दौरान उन्होंने हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं को जानवरों के प्रति क्रूरता से जोड़ने वाला दावा भी किया था।आईआईटी मंडी के निदेशक पद पर नियुक्ति के कुछ समय बाद उनका एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें उन्होंने मंत्रों के जाप के जरिए एक मित्र के परिवार को कथित तौर पर बुरी आत्माओं से छुटकारा दिलाने में मदद करने की बात कही थी।प्रो. बेहरा का इस्कॉन और भगवद्गीता से लंबे समय से जुड़ाव रहा है। वह करीब 27 वर्षों से युवाओं को भगवद्गीता के माध्यम से शांति और जीवन मूल्यों की शिक्षा देने की बात कहते रहे हैं। आईआईटी मंडी में भगवद्गीता से जुड़ा तीन क्रेडिट का पाठ्यक्रम भी पढ़ाया जाता है।