summer express , अंकुर कपूर ,अंबाला। देशभर में 14 सितंबर से गणेश उत्सव की शुरुआत होने जा रही है। इसे लेकर अंबाला में भी तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। राजस्थान से आए मूर्तिकार पिछले कई महीनों से भगवान गणेश की प्रतिमाएं तैयार करने में जुटे हैं। श्रद्धालुओं ने अभी से गणेश प्रतिमाओं की बुकिंग करानी शुरू कर दी है। गणेश उत्सव का समापन 25 सितंबर को प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ होगा।
गणेश उत्सव की शुरुआत वैसे तो महाराष्ट्र में बड़े स्तर पर होती थी, लेकिन अब यह पर्व देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। अंबाला में भी इस उत्सव की शुरुआत के पीछे राजस्थान से आए मूर्तिकारों की खास भूमिका रही है। मूर्तिकारों के मुताबिक, करीब दो दशक पहले वे राजस्थान से अंबाला आए थे और यहां प्रतिमाएं बनाने का काम शुरू किया था।
मूर्तिकारों ने बताया कि प्रतिमा निर्माण उनका खानदानी कारोबार है। राजस्थान में प्राकृतिक आपदा के बाद वे अंबाला आए थे। शुरुआत में वे भगवान शिव-शंकर समेत अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं बनाया करते थे। इसी दौरान कुछ आर्मी कर्मी उनके पास भगवान गणेश की प्रतिमा बनवाने के लिए पहुंचे। उस समय उन्हें गणेश प्रतिमा बनाने का ज्यादा अनुभव नहीं था, लेकिन सेना के जवानों की मांग पर उन्होंने गणेश जी की प्रतिमा तैयार करनी शुरू की।
मूर्तिकारों के अनुसार, इसके बाद धीरे-धीरे अंबाला में भी गणेश उत्सव का चलन बढ़ता गया और लोग गणेश प्रतिमाएं खरीदने लगे। आज स्थिति यह है कि अंबाला के अलावा हिमाचल प्रदेश और आसपास के अन्य क्षेत्रों से भी श्रद्धालु यहां गणेश प्रतिमाएं खरीदने पहुंचते हैं।
मूर्तिकारों का कहना है कि गणेश उत्सव साल में एक बार आता है और इसी सीजन की कमाई से उनके परिवार का पूरे साल का खर्च चलता है। गणेश प्रतिमाओं के साथ वे अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी तैयार करते हैं। हालांकि लंबे समय से प्रतिमा निर्माण का काम करने के बावजूद इन मूर्तिकारों के परिवार आज भी झोंपड़ियों में रहकर अपना जीवन गुजार रहे हैं।