summer express, नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को स्पष्ट किया कि 2,000 रुपये तक के UPI लेनदेन और RuPay डेबिट कार्ड से किए जाने वाले भुगतान पर बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर किसी तरह का शुल्क नहीं लगा सकते। मंत्रालय ने कहा कि पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A के तहत इस तरह के भुगतान पर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से चार्ज वसूलने की अनुमति नहीं है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, केंद्र सरकार ने बैंकों और सिस्टम प्रोवाइडर्स को RuPay डेबिट कार्ड के जरिए भुगतान करने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति से किसी भी प्रकार का शुल्क लेने से प्रतिबंधित किया है। यही नियम 2,000 रुपये तक के UPI लेनदेन पर भी लागू होता है।
हालांकि, अगस्त में सरकार ने एक तय सीमा से अधिक के कुछ चुनिंदा UPI मर्चेंट लेनदेन पर मामूली मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का रास्ता साफ किया था। सरकार ने साथ ही स्पष्ट किया था कि उपभोक्ताओं और व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) के बीच होने वाले UPI भुगतान मुफ्त बने रहेंगे।
सरकार के मुताबिक, इस बदलाव का उद्देश्य भारत के डिजिटल भुगतान ढांचे को लंबे समय तक टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बनाए रखना है। साथ ही, इससे देश की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
वित्त मंत्रालय ने इस नीति बदलाव को लेकर सामने आई उन रिपोर्टों को भी खारिज किया, जिनमें इसके पीछे किसी बाहरी प्रभाव की बात कही गई थी। मंत्रालय ने ऐसे दावों को बेबुनियाद, पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया।