summer express , नई दिल्ली। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सूचकांक और शेयरों से जुड़े वायदा-विकल्प अनुबंधों के समाप्ति दिवस पर निपटान मूल्य तय करने की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव हाल ही में शुरू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) की समीक्षा और बाजार प्रतिभागियों से मिली प्रतिक्रियाओं के आधार पर तैयार किया गया है।
सेबी ने जारी परामर्श पत्र में निपटान मूल्य निर्धारित करने के लिए दो विकल्प सुझाए हैं। पहले विकल्प के तहत लगातार कारोबार वाले सत्र (सीटीएस) के अंतिम 30 मिनट और 10 मिनट के सीएएस में हुए कारोबार को मिलाकर संयुक्त मात्रा भारित औसत कीमत (वीडब्ल्यूएपी) तय करने का प्रस्ताव है।
दूसरे विकल्प में मौजूदा सीटीएस वीडब्ल्यूएपी व्यवस्था को ही जारी रखने का सुझाव दिया गया है। सेबी के मुताबिक, ये विकल्प बाजार प्रतिभागियों से प्राप्त सुझावों और समाप्ति दिवस पर डेरिवेटिव अनुबंधों के निपटान मूल्य को लेकर सामने आई चिंताओं को ध्यान में रखते हुए रखे गए हैं।
बाजार प्रतिभागियों ने विशेष रूप से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी थी कि डेरिवेटिव अनुबंधों का निपटान सीएएस के तहत निर्धारित क्लोजिंग प्राइस के आधार पर किया जाना चाहिए या नहीं। इसी के बाद सेबी ने मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए वैकल्पिक तरीकों पर राय मांगी है।
सेबी ने तीन अगस्त से इक्विटी नकद बाजार में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन की व्यवस्था लागू की थी। इसका उद्देश्य कारोबार के अंत में शेयरों का क्लोजिंग प्राइस निर्धारित करना है। मौजूदा व्यवस्था के तहत सीएएस से तय क्लोजिंग प्राइस को ही समाप्ति दिवस पर डेरिवेटिव अनुबंधों के निपटान मूल्य का आधार बनाया जाता है। प्रस्तावित बदलावों पर बाजार प्रतिभागियों से सुझाव मांगे गए हैं।