Summer express,वर्जीनिया। अमेरिका के वर्जीनिया में भारतीय मूल के नरेश भट्ट और उनकी पत्नी ममता कफले भट्ट से जुड़े बहुचर्चित मामले में सुनवाई के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। 39 वर्षीय नरेश भट्ट ने अदालत में स्वीकार किया है कि उसने अपनी पत्नी के शव के टुकड़े करने और उसे ठिकाने लगाने की कोशिश की थी। हालांकि, उसने पत्नी की हत्या करने के आरोप से इनकार किया है। 28 वर्षीय ममता जुलाई 2024 से लापता हैं और अब तक उनका शव बरामद नहीं हो सका है।
अदालत में गवाही के दौरान नरेश भट्ट ने 30 जुलाई 2024 की सुबह की घटनाओं के बारे में विस्तार से बताया। उसने कहा कि 29 जुलाई की रात करीब 8 बजे वह अपनी छोटी बेटी के साथ सोने चला गया था। अगली सुबह करीब 4 बजे जब वह बाथरूम जाने के लिए उठा तो उसे घर में अजीब सी दुर्गंध महसूस हुई। इसके बाद जब वह बेडरूम में पहुंचा तो उसने ममता को बिस्तर के निचले हिस्से के पास पीठ के बल पड़ा हुआ देखा।
भट्ट ने अदालत में दावा किया कि उसे लगा कि ममता ने कुछ गोलियां और जहरीला कीटनाशक खाकर आत्महत्या कर ली है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है। अदालत में जब उससे पूछा गया कि उसने तत्काल आपातकालीन सेवा 911 पर फोन क्यों नहीं किया, तो उसने कहा कि वह बुरी तरह घबरा गया था और उसे समझ नहीं आ रहा था कि ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए।
आरोपी के मुताबिक, उसने करीब एक घंटे तक ममता को होश में लाने की कोशिश की। इसके बाद वह उसके शरीर को बाथरूम में ले गया। जब उसे लगा कि ममता की मौत हो चुकी है तो वह डर गया और शव को ठिकाने लगाने के बारे में सोचने लगा। उसने पुलिस को सूचना देने या किसी से मदद मांगने के बजाय शव छिपाने की योजना बनानी शुरू कर दी।
नरेश भट्ट ने अदालत में बताया कि उसने पहले अपनी छोटी बेटी को एक बेबीसिटर के पास छोड़ा और फिर सामान खरीदने के लिए होम डिपो स्टोर पहुंचा। उसने स्वीकार किया कि वहां वह शव को छिपाने के लिए जरूरी सामान तलाश रहा था। घर लौटने के बाद उसने आत्महत्या करने के बारे में भी सोचा था। इसके लिए उसने वायर केबल और कुछ अन्य सामान जुटाया, लेकिन बाद में अपना इरादा बदल दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब नरेश भट्ट ने अपनी पत्नी के शव के टुकड़े करने की कोशिश करने की बात स्वीकार की। बचाव पक्ष के वकील के सवालों का जवाब देते हुए उसने बताया कि उसने शव के पैरों को शरीर से अलग करने का प्रयास किया था। इसके लिए उसने घर के बाथरूम में आरी का इस्तेमाल किया था। हालांकि, उसने दावा किया कि मानसिक और शारीरिक रूप से टूट जाने के कारण वह इस काम को पूरा नहीं कर सका और बीच में ही प्रयास छोड़ दिया।
भट्ट की इस गवाही से अभियोजन पक्ष के उन दावों को मजबूती मिल सकती है, जिनमें घर के बाथरूम में फोरेंसिक साक्ष्य मिलने की बात कही गई थी। जांचकर्ताओं के अनुसार, घर में ‘ब्लूस्टार’ केमिकल का इस्तेमाल कर खून के निशान मिटाने की कोशिश की गई थी। हालांकि, फोरेंसिक जांच के दौरान बाथटब के पास की टाइल्स, शॉवर एरिया और बेडरूम के दरवाजे के आसपास खून के निशान पाए गए थे।
जांच के मुताबिक, ममता कफले भट्ट को आखिरी बार 29 जुलाई 2024 को वीडियो कॉल पर देखा गया था। अभियोजन पक्ष ने मामले में फोरेंसिक रिपोर्ट, घर से मिले डीएनए साक्ष्य और गवाहों के बयानों को अहम आधार बनाया है। गवाहों ने बताया है कि ममता अपनी छोटी बेटी को कभी अपनी मर्जी से अकेला नहीं छोड़ती थीं।
नरेश भट्ट पर फर्स्ट-डिग्री हत्या, शव को छिपाने और शव के साथ छेड़छाड़ करने समेत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, उसने खुद को निर्दोष बताया है और हत्या के आरोप से इनकार किया है। ममता का शव अब तक नहीं मिलने के कारण अभियोजन पक्ष का मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, फोरेंसिक जांच और आरोपी की अदालत में दी गई गवाही पर आधारित है। फिलहाल मामले में कानूनी सुनवाई जारी है।