वॉशिंगटन। मध्य पूर्व में अमेरिकी युद्धपोतों और सैनिकों की बढ़ती तैनाती के बीच अमेरिका ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है। संभावित वार्ता से ठीक पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि कूटनीतिक पहल को कमजोरी समझना ईरान की गंभीर भूल होगी। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया के “सबसे खतरनाक और अस्थिर” शासन को परमाणु हथियार हासिल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती और अमेरिका के सैन्य विकल्प केवल बयान नहीं, बल्कि वास्तविक विकल्प हैं।
इससे एक दिन पहले राष्ट्रपति Donald Trump ने संसद को संबोधित करते हुए ईरान पर आरोप लगाया था कि वह ऐसी मिसाइलें विकसित कर रहा है जो अमेरिका तक मार करने में सक्षम हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर रहा है, जिसे पिछले वर्ष अमेरिकी कार्रवाई में नुकसान पहुंचा था। उन्होंने इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।
इसी बीच स्विट्जरलैंड के Geneva में अमेरिका और ईरान के बीच अहम बातचीत प्रस्तावित है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ जिनेवा पहुंच चुके हैं, जबकि अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व मध्य पूर्व के विशेष दूत Steve Witkoff कर रहे हैं। हालांकि वार्ता से पहले ही अमेरिका ने “मैक्सिमम प्रेशर” नीति के तहत ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है।
वेंस ने कहा कि ट्रंप प्रशासन कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देता है, लेकिन यदि बातचीत विफल होती है तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी खुला रहेगा। उनका कहना था कि अमेरिका का उद्देश्य केवल इतना है कि ईरान किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल न कर सके। ईरान के सर्वोच्च नेता को हटाने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में अंतिम निर्णय राष्ट्रपति ही करेंगे।
उधर ईरान ने अमेरिकी आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें “बड़ा झूठ” बताया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्रंप के बयानों को दुष्प्रचार करार दिया और चेतावनी दी कि यदि किसी तरह का हमला हुआ तो मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने निशाने पर होंगे। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद लंबे समय से जारी है। पश्चिमी देशों और International Atomic Energy Agency का दावा है कि ईरान ने 2003 तक परमाणु हथियार कार्यक्रम संचालित किया था। हाल के वर्षों में 60 प्रतिशत तक यूरेनियम संवर्धन की खबरों ने चिंता और बढ़ा दी है, जिसे हथियार-स्तर के बेहद करीब माना जाता है।