Summer express, गुरुग्राम। मानसून के दौरान लगातार सामने आ रही सड़क धंसने की घटनाओं ने गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) की चिंता बढ़ा दी है। शहर की सड़कों के नीचे बिछे पुराने सीवर और स्ट्रॉम वाटर ड्रेन नेटवर्क की स्थिति जानने के लिए जीएमडीए करीब 600 किलोमीटर लंबे भूमिगत नेटवर्क का तकनीकी सर्वे कराने जा रहा है। सर्वे का काम अगले महीने से शुरू होने की संभावना है। इसके जरिए पुरानी लाइनों की स्थिति, लीकेज वाले स्थान और कमजोर हिस्सों की पहचान की जाएगी।
जीएमडीए अधिकारियों के अनुसार, सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन सीवर और ड्रेनेज लाइनों की मरम्मत से काम चल सकता है और किन्हें पूरी तरह बदलना जरूरी है। अधिकारियों का मानना है कि पुरानी भूमिगत लाइनों में लीकेज के कारण सड़क के नीचे की मिट्टी कमजोर हो रही है, जिससे बारिश के दौरान सड़क धंसने का खतरा बढ़ जाता है।
हाल ही में इफको चौक की सर्विस लेन पर सड़क धंसने की घटना ने भूमिगत नेटवर्क की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। जांच के दौरान सामने आया कि सड़क के नीचे जीएमडीए की पुरानी और बड़ी सीवर लाइन में लीकेज हुआ था। लगातार पानी रिसने के कारण आसपास की मिट्टी कमजोर हुई और इसके बाद सड़क की सतह धंस गई। इससे पहले छह मई को भी सोहना हाईवे पर सीवर लाइन में लीकेज के चलते सड़क का बड़ा हिस्सा धंस गया था।
जीएमडीए के अधिकारियों के मुताबिक, शहर के कई इलाकों में सीवर और स्ट्रॉम वाटर ड्रेन की लाइनें करीब 25 से 30 वर्ष पुरानी हैं। इनका निर्माण जीएमडीए के गठन से पहले हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) और जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) की ओर से कराया गया था। वर्ष 2017 में जीएमडीए के गठन के बाद शहर का मास्टर सीवर और ड्रेनेज नेटवर्क प्राधिकरण के अधीन आया।
समय बीतने के साथ इन पुरानी लाइनों में पानी के दबाव, पाइप के जोड़ कमजोर होने और लीकेज जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। मानसून के दौरान बारिश का पानी जमीन में जाने से भूमिगत हिस्सों पर दबाव बढ़ जाता है। यदि इसी दौरान सीवर लाइन में रिसाव हो तो सड़क के नीचे की मिट्टी धीरे-धीरे कमजोर होकर बैठ सकती है। यही वजह है कि कई बार सड़क ऊपर से सामान्य दिखाई देने के बावजूद अचानक धंस जाती है।
प्रस्तावित तकनीकी सर्वे में भूमिगत पाइपों की मजबूती, उनकी क्षमता, लीकेज वाले स्थान और क्षतिग्रस्त हिस्सों की विस्तृत जांच की जाएगी। जिन लाइनों में मामूली खराबी है और जिन्हें मरम्मत से सुरक्षित बनाया जा सकता है, उन्हें सीआईपीपी यानी क्योर-इन-प्लेस पाइप तकनीक के माध्यम से मजबूत करने पर विचार किया जाएगा। इस तकनीक में सड़क की बड़े स्तर पर खुदाई किए बिना पुरानी पाइप के भीतर नई मजबूत परत तैयार की जाती है।
वहीं, जिन सीवर या ड्रेनेज लाइनों की स्थिति बेहद खराब होगी या जिनकी क्षमता मौजूदा जरूरत के मुताबिक पर्याप्त नहीं होगी, उन्हें बदलने का निर्णय लिया जाएगा। जीएमडीए का उद्देश्य केवल सड़क की सतह की मरम्मत करना नहीं, बल्कि सड़क के नीचे मौजूद नेटवर्क की मूल समस्या का समाधान करना है।
जीएमडीए के सीईओ पीसी मीणा के अनुसार, सीवर और स्ट्रॉम वाटर ड्रेन नेटवर्क का सर्वे कराया जाएगा। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जरूरत के अनुसार लाइनों की मरम्मत या उन्हें बदलने का फैसला लिया जाएगा, ताकि भविष्य में सड़क धंसने जैसी घटनाओं को रोका जा सके। अधिकारियों का कहना है कि सर्वे पूरा होने के बाद मरम्मत और लाइन बदलने के काम को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।