Summer express , मोनिका रावत ,चंडीगढ़। हांसी में 15 अगस्त को डेयरी संचालक जीवन कुंडू की हत्या के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुंच गया है। जनहित याचिका दायर कर पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच कराने और पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश देने की मांग की है।
याचिका में पुलिस की भीड़ नियंत्रण कार्रवाई, बल प्रयोग की आवश्यकता और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से मामले की स्टेटस रिपोर्ट देने का आदेश देते हुए सुनवाई 28 सितम्बर तक स्थगित कर दी। याचिका के अनुसार 12 अगस्त को हिसार में हुई महापंचायत में प्रदर्शन का कार्यक्रम घोषित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने 14 अगस्त को टोल प्लाजा पर विरोध और 15 अगस्त को हांसी में मुख्यमंत्री के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान पहुंचने की घोषणा की थी।
याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रशासन को पहले से प्रदर्शन की जानकारी थी और ऐसे में पुलिस के पास सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग, कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की तैनाती तथा भीड़ नियंत्रण के लिए आवश्यक संसाधनों की तैयारी का पर्याप्त समय था। याचिका में कहा गया है कि 15 अगस्त को प्रदर्शनकारियों के हांसी के सरकारी कॉलेज में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह की ओर बढ़ने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। इसके बाद बड़े स्तर पर लाठीचार्ज और पथराव हुआ तथा दोनों पक्षों के लोग घायल हुए। याचिका के साथ इस घटनाक्रम से जुड़े वीडियो, समाचार रिपोर्ट और घायल प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें भी संलग्न की गई हैं। याचिकाकर्ता ने एक समाचार रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया है कि हांसी के पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार को वीडियो में प्रदर्शनकारियों की ओर पत्थर फेंकते हुए दिखाया गया है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि एक अन्य वीडियो में सीआइए हांसी के निरीक्षक कप्तान सिंह एक पुलिसकर्मी की एके-47 राइफल की ओर हाथ बढ़ाते और उसे भीड़ की तरफ लहराते दिखाई देते हैं। हालांकि हथियार चलाए जाने की बात को लेकर पुलिस अधिकारी की ओर से कथित तौर पर इनकार किया गया था।