Summer express/चिंतपूर्णी, विकास- : उत्तर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ माता चिंतपूर्णी में शारदीय नवरात्र के दौरान महाअष्टमी का पर्व धार्मिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। मंदिर परिसर दिनभर माता रानी के जयकारों से गूंजता रहा। इस पावन अवसर पर पंजाब, दिल्ली, हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में माथा टेका और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।महाअष्टमी के उपलक्ष्य में मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। मंदिर प्रशासन और पुजारियों की ओर से माता रानी का भव्य शृंगार कर उन्हें छप्पन भोग अर्पित किए गए। इसके पश्चात मंदिर परिसर में स्थित मुख्य हवन कुंड में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हवन-यज्ञ संपन्न हुआ। इस दौरान विश्व कल्याण, सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हुए आहुतियां डाली गईं। परंपरा के अनुसार प्रतीकात्मक रूप से नारियल की बलि भी दी गई।
इस बार पंचांग के अनुसार अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष संयोग देखने को मिला। महाअष्टमी की तिथि सुबह 10:51 बजे तक रही, जिसके चलते श्रद्धालुओं ने सुबह के समय ही व्रत, पूजा-अर्चना और दर्शन संबंधी धार्मिक परंपराएं पूरी कीं। इसके बाद महानवमी तिथि शुरू होने पर कई श्रद्धालुओं ने नवमी पूजन की तैयारियां शुरू कर दीं।नवरात्र मेले के दौरान विभिन्न राज्यों से पहुंची सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं ने श्रद्धालुओं के लिए लंगर लगाए और सेवा कार्य किए। महाअष्टमी पर कई संस्थाओं की ओर से कन्या पूजन का आयोजन भी किया गया। इस दौरान छोटी कन्याओं को पूड़ी, चना और हलवे का प्रसाद परोसकर उनका आशीर्वाद लिया गया। कन्या पूजन संपन्न होने के बाद बाहरी राज्यों से आईं कई लंगर समितियों ने अपने गंतव्यों की ओर लौटना शुरू कर दिया।
मेलाधिकारी एवं एसडीएम पारस अग्रवाल ने बताया कि माता चिंतपूर्णी का नवरात्र मेला शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि प्रशासन, पुलिस और मंदिर न्यास के बेहतर तालमेल से श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन उपलब्ध करवाए गए। मेले के दौरान व्यवस्थाएं सुचारू रहीं और श्रद्धालुओं को किसी बड़ी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।