Summer express, पटियाला। पंजाब में धान की कटाई का काम अंतिम चरण में पहुंच गया है, लेकिन इसके बावजूद पराली जलाने की घटनाएं जारी हैं। पांच नवंबर तक प्रदेश में सैटेलाइट के माध्यम से पराली जलाने के कुल 2,787 मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं के संबंध में पर्यावरण क्षतिपूर्ति के तौर पर 46.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसमें से अब तक 24.85 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है।
कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) की पांच नवंबर तक जारी रिपोर्ट के अनुसार, तरनतारन जिला पराली जलाने के मामलों में सबसे आगे है। यहां अब तक 586 घटनाएं दर्ज की गई हैं। प्रशासन ने इन मामलों में 14.95 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जिसमें से 13.30 लाख रुपये वसूल किए जा चुके हैं। इसके अलावा जिले के 13 नोडल और सुपरवाइजरी अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
अमृतसर जिले में पराली जलाने के 221 मामले सामने आए हैं। यहां 5.35 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से 4.75 लाख रुपये की वसूली हुई है। वहीं, फिरोजपुर में 361 घटनाएं दर्ज की गई हैं। तरनतारन के बाद यह प्रदेश का दूसरा सबसे अधिक प्रभावित जिला है। फिरोजपुर में 7.35 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जबकि अब तक केवल 1.60 लाख रुपये की वसूली हो पाई है। यहां पांच अधिकारियों के खिलाफ भी अभियोजन की कार्रवाई शुरू की गई है।
संगरूर में पराली जलाने की 240, बठिंडा में 216 और पटियाला में 156 घटनाएं दर्ज की गई हैं। पटियाला जिले में 2.15 लाख रुपये का पर्यावरण क्षतिपूर्ति जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से 70 हजार रुपये वसूल किए गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में धान की खेती का कुल रकबा 32.87 लाख हेक्टेयर है। इसमें से अब तक 87.60 प्रतिशत क्षेत्र में फसल की कटाई पूरी हो चुकी है। पराली जलाने के 106 मामलों में जिम्मेदार पाए गए लोगों के खेतों के राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री भी की गई है।
पराली जलाने की घटनाओं को लेकर कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत प्रदेश में 710 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसके अलावा 829 नोडल और सुपरवाइजरी अधिकारियों को चेतावनी या कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि, रिपोर्ट में इन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने या निलंबन की कोई कार्रवाई दर्ज नहीं की गई है।