Kullu, Manminder
लगातार मूसलधार बारिश ने हिमाचल की कुल्लू घाटी में तबाही मचा दी है। खेतों में मेहनत से उगाई गई फसलें—टमाटर, मक्की, गोभी, और शिमला मिर्च—खुद ब खुद खेतों में सड़ रही हैं। बागवानी फसलें भी इससे अछूती नहीं रहीं। नाशपाती पेड़ पर ही गल गई, जबकि सेब की क्वालिटी बीमारी और अत्यधिक नमी के कारण गिर गई है।
बागवानी विभाग ने अब तक 1.15 करोड़ रुपये और कृषि विभाग ने 56 लाख रुपये का नुकसान दर्ज किया है। यानी कुल 1.71 करोड़ रुपये की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं, और ये आंकड़े अभी और बढ़ सकते हैं।
रास्ते बंद, मंडियों में कोई खरीदार नहीं
बारिश ने सिर्फ खेतों को ही नहीं, बल्कि किसानों की उम्मीदों को भी बहा दिया है। मुख्य मार्ग और संपर्क सड़कें बंद होने से किसान मंडियों तक नहीं पहुंच पा रहे। मंडियों में खरीदार नहीं हैं, और जो थोड़ी-बहुत उपज पहुंच भी रही है, वह सही दामों में बिक नहीं पा रही।
किसानों और अफसरों की ज़ुबानी
देवराज, एक स्थानीय बागवान ने बताया:“नाशपाती तुड़ान से पहले ही सड़ गई। सेब पर स्कैब और फफूंदी लग गई है। आढ़ती भी डर रहे हैं, माल नहीं खरीद रहे।”
राजेश, एक किसान, बोले:“चार हजार पौधे टमाटर के लगाए थे, सब सड़ गए। अब गोभी और शिमला मिर्च की बारी है। यही हाल रहा तो सब खत्म हो जाएगा।”
रामनाथ ठाकुर, उपनिदेशक, उद्यान विभाग:“5147 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों को नुकसान हुआ है। फलों में रोग तेजी से फैल रहे हैं।”
सुशील शर्मा, उपनिदेशक, कृषि विभाग:“.22 हेक्टेयर मक्की और 18 हेक्टेयर में टमाटर जैसी नकदी फसलें प्रभावित हुई हैं। नुकसान 56 लाख से ज़्यादा है।”
भविष्य की चिंता और राहत की दरकार
कुल्लू घाटी के किसान और बागवान अब राहत की आस लगाए बैठे हैं। अगर मौसम का मिजाज यूं ही बना रहा, तो नुकसान न सिर्फ वर्तमान सीजन की फसल तक सीमित रहेगा, बल्कि हज़ारों परिवारों की आजीविका भी दांव पर लग जाएगी।