Summer express,कैथल | हरियाणा के राइस मिलरों को केंद्र सरकार ने बड़ी राहत दी है। अब कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) में फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) की अनिवार्य आपूर्ति में छूट दे दी गई है। पहले नियम के अनुसार 100 किलोग्राम चावल में एक किलोग्राम एफआरके मिलाना अनिवार्य था, लेकिन प्रदेश में पर्याप्त एफआरके उपलब्ध नहीं होने के कारण मिलरों को आपूर्ति में मुश्किलें आ रही थीं। अब मिलर अपनी सुविधा अनुसार फोर्टिफाइड या सामान्य चावल दोनों आपूर्ति कर सकते हैं।
केंद्र सरकार ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजकर नई व्यवस्था की जानकारी दे दी है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) और अन्य केंद्र योजनाओं के तहत जब तक पर्याप्त फोर्टिफाइड चावल उपलब्ध नहीं होगा, तब तक इसे अस्थायी रूप से लागू नहीं किया जाएगा। प्रदेश में लगभग 1,350 राइस मिलरों को सीएमआर नीति के तहत चावल और धान प्रदान किया गया था, जिसमें 67 प्रतिशत चावल की आपूर्ति अनिवार्य थी। कुल मिलाकर मिलरों को 59.41 लाख टन धान दिया गया।
फोर्टिफाइड राइस कर्नेल पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जिसमें आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन शामिल होते हैं। इसे ‘एक्सट्रूज़न’ तकनीक के जरिए सामान्य चावल में मिलाया जाता है और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत वितरित किया जाता है। इससे कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है।
अंबाला जिले में अब तक सबसे अधिक सीएमआर डिलीवरी हुई है, जो कुल लक्ष्य का 61.72 प्रतिशत है। अन्य जिले जैसे करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत और रोहतक में डिलीवरी अपेक्षाकृत कम रही। 30 जून तक शेष चावल की आपूर्ति पूरी करनी है।
प्रदेश में अभी लगभग 28,90,260 मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी बाकी है। यदि गोदाम खाली नहीं हुए, तो नई फसल के भंडारण में समस्या पैदा हो सकती है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर एफआरके चावल के भंडार की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे और बाद में नियम को पूरी तरह लागू किया जाएगा।