Summer express, चंडीगढ़ | हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में छात्रों की लगातार आत्महत्या और आत्महत्या के प्रयासों की घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेते हुए गंभीर रुख अपनाया है। आयोग ने संस्थान प्रशासन, जिला प्रशासन और पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
आयोग के अध्यक्ष ललित बत्रा की अध्यक्षता में पूर्ण पीठ ने हाल की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई है। जानकारी के अनुसार, प्रथम वर्ष के एक छात्र ने हॉस्टल की पांचवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या का प्रयास किया था, जिसे समय रहते बचा लिया गया। इससे पहले द्वितीय वर्ष के एक छात्र का शव उसके हॉस्टल कमरे में मिला था। फरवरी और मार्च में भी दो छात्रों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं, जिससे संस्थान में छात्र सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
आयोग ने कहा है कि अब तक उठाए गए कदम, जैसे दो प्रोफेसरों का स्थानांतरण, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। यह घटनाक्रम मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, काउंसलिंग व्यवस्था, निगरानी तंत्र और संकट प्रबंधन प्रणाली में गंभीर खामियों की ओर संकेत करता है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि छात्रों के मानसिक और शारीरिक कल्याण को सुनिश्चित करना भी है।
इसी मामले में आयोग ने NIT निदेशक से आत्महत्या से जुड़ी परिस्थितियों, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षा उपायों, मेंटर-मेंटी प्रणाली और हॉस्टल खाली कराने के आदेशों के कारणों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही कुरुक्षेत्र के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक से भी जांच, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की गई है।
असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा के अनुसार, सभी संबंधित अधिकारियों को 19 मई 2026 की सुनवाई से एक सप्ताह पहले अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपनी होगी।