Summer express/चंडीगढ़-:हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वीरवार को चंडीगढ़ में मंत्रिमंडल की बैठक के बाद प्रेस वार्ता कर सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी दी। बैठक में कुल 12 एजेंडे रखे गए, जिन्हें मंत्रिमंडल ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी। मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र 27 अगस्त से शुरू होगा।निजी कोचिंग संस्थानों के लिए नए नियम मंत्रिमंडल ने ‘हरियाणा निजी कोचिंग संस्थान (पंजीकरण और विनियमन) नियम, 2026’ को मंजूरी दी। इसके तहत राज्य में संचालित सभी निजी कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। नए और मौजूदा संस्थानों को निर्धारित पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा। पंजीकरण शुल्क 10 हजार रुपये और इसकी वैधता तीन वर्ष होगी, जबकि नवीनीकरण शुल्क 5 हजार रुपये निर्धारित किया गया है।
कोचिंग संस्थानों को अपनी वेबसाइट पर पाठ्यक्रम, फीस, कक्षाओं की क्षमता, शिक्षकों एवं कर्मचारियों की योग्यता, छात्रों की संख्या और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देनी होगी। संस्थानों में पेयजल, अलग शौचालय, अग्नि सुरक्षा, प्राथमिक उपचार और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करना भी अनिवार्य होगा। स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई के समय कोचिंग कक्षाएं आयोजित नहीं की जा सकेंगी।
5,714 करोड़ रुपये के वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम को मंजूरी
हरियाणा के जल संसाधनों को मजबूत करने के लिए मंत्रिमंडल ने विश्व बैंक वित्त पोषित ‘वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोग्राम’ को मंजूरी दी। इस कार्यक्रम की अनुमानित लागत 5,714.80 करोड़ रुपये है, जिसमें 4,000.36 करोड़ रुपये विश्व बैंक ऋण और 1,714.44 करोड़ रुपये राज्य सरकार का हिस्सा होगा।कार्यक्रम 15 प्राथमिकता वाले सिंचाई क्लस्टरों में लागू किया जाएगा और करीब 48.94 लाख एकड़ सिंचाई योग्य कमांड एरिया को कवर करेगा। इससे लगभग 45 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।इसके तहत 104 नहर चैनलों का करीब 2,484.87 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्वास किया जाएगा। लगभग 248 करोड़ रुपये से 131 नए जलाशय बनाए जाएंगे और चार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित पानी के पुन: उपयोग पर करीब 282.13 करोड़ रुपये खर्च होंगे।नहरों की रियल टाइम निगरानी के लिए 20 SCADA स्थान और 400 RTDAS माप बिंदु स्थापित किए जाएंगे। MICADA के तहत 620 वाटरकोर्स का पुनर्वास और 120 नहर आधारित सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। इसके अलावा करीब 2 लाख एकड़ जलभराव वाली भूमि में ड्रेनेज सुधार, 5 लाख एकड़ में डायरेक्ट सीडेड राइस और 1.12 लाख एकड़ में फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा।
स्टार्टअप नीति में बड़ा विस्तार
मंत्रिमंडल ने हरियाणा स्टार्टअप नीति-2022 में व्यापक पूरक प्रावधानों को मंजूरी दी। महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप को एक वर्ष के लिए लीज किराए पर 50 प्रतिशत सब्सिडी, अधिकतम 10 लाख रुपये तक, दी जाएगी। उन्हें सात वर्ष तक शुद्ध SGST की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति का भी प्रावधान किया गया है, जबकि सामान्य स्टार्टअप को सात वर्ष तक 50 प्रतिशत SGST प्रतिपूर्ति मिलेगी।स्टार्टअप को टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग और ट्रांसफर के लिए 10 लाख रुपये तक की सहायता, घरेलू प्रदर्शनियों में भागीदारी के लिए वित्तीय सहयोग और गुणवत्ता प्रमाणन लागत की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति, अधिकतम 25 लाख रुपये तक, मिलेगी।
स्कूल विद्यार्थियों के बीच 10 हजार DIY किट वितरित की जाएंगी और राज्य में विश्वस्तरीय ‘एच-हब’ इन्क्यूबेटर स्थापित किया जाएगा। सरकारी खरीद में हरियाणा आधारित पात्र स्टार्टअप के लिए विभागीय खरीद का 10 प्रतिशत हिस्सा आरक्षित करने का भी प्रावधान किया गया है।निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सीड फंड मैचिंग प्रावधान के तहत निजी या एंजल निवेशक से जुटाए गए प्रत्येक 25 लाख रुपये के निवेश पर 25 लाख रुपये तक का सह-निवेश या मैचिंग ग्रांट उपलब्ध कराई जाएगी। अप्रेंटिसशिप के लिए प्रति प्रशिक्षु प्रति माह 7,500 रुपये तक के वजीफे की 50 प्रतिशत लागत की प्रतिपूर्ति भी की जाएगी।
नर्सिंग होम खोलने के नियमों में बदलाव
मंत्रिमंडल ने लाइसेंस प्राप्त आवासीय कॉलोनियों में नर्सिंग होम स्थापित करने की नीति में संशोधन को भी मंजूरी दी। अब पात्र डॉक्टर अपने स्वामित्व वाले आवासीय प्लॉट के अलावा लीज पर लिए गए आवासीय प्लॉट पर भी नर्सिंग होम स्थापित कर सकेंगे।
इसके लिए निर्धारित कन्वर्जन शुल्क का भुगतान करना होगा। एलोपैथिक और आयुष पद्धति के डॉक्टरों को मरीजों के भर्ती एवं इनडोर उपचार की सुविधा वाले नर्सिंग होम स्थापित करने की अनुमति होगी। डॉक्टर के पास संबंधित मेडिकल या आयुष काउंसिल का पंजीकरण होना और वर्तमान में प्रैक्टिस करना आवश्यक होगा।लीज पर लिए गए प्लॉट पर दी गई अनुमति लीज की अवधि तक ही प्रभावी रहेगी। इससे पहले यह सुविधा केवल डॉक्टरों के स्वामित्व वाले आवासीय प्लॉट तक सीमित थी।इन फैसलों के जरिए सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में नियमन, जल सुरक्षा, स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया है।