समर न्यूज | भरमौर
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में भगवान शिव की प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा शुरू हो गई है। भरमौर प्रशासन ने इस बार श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को प्राथमिकता देते हुए कई नए नियम लागू किए हैं।
यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य किया गया है और प्रतिदिन अधिकतम 5,000 श्रद्धालुओं को ही आगे जाने की अनुमति होगी। हड़सर में स्वास्थ्य जांच के बाद ही श्रद्धालुओं को पैदल मार्ग पर आगे बढ़ने दिया जाएगा।
मणिमहेश यात्रा को लेकर तारीखों के संबंध में प्रशासनिक कार्यक्रम में चरणबद्ध व्यवस्था है। चंबा जिला प्रशासन के आधिकारिक पोर्टल पर मुख्य आधिकारिक यात्रा अवधि 4 से 19 सितंबर दी गई है, जबकि 25 अगस्त से श्रद्धालुओं की यात्रा शुरू करने की व्यवस्था की गई है। 4 सितंबर को छोटा शाही स्नान और 19 सितंबर को राधाष्टमी के अवसर पर प्रमुख स्नान होगा।
प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण और स्लॉट व्यवस्था लागू की है। एक मोबाइल नंबर से अधिकतम पांच लोगों का एक आवेदन किया जा सकता है। श्रद्धालुओं को पंजीकरण की रसीद का प्रिंटआउट साथ रखना होगा। प्रशासन ने लोगों से भरमौर पहुंचने से पहले ही पंजीकरण पूरा करने की अपील की है, क्योंकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट की सुविधा कमजोर हो सकती है। यात्रा मार्ग कठिन और ऊंचाई वाला होने के कारण स्वास्थ्य जांच को भी महत्वपूर्ण बनाया गया है। हड़सर आधार शिविर पर श्रद्धालुओं की फिटनेस जांच की व्यवस्था की गई है। अस्वस्थ या यात्रा के लिए अनुपयुक्त पाए जाने वाले लोगों को आगे जाने से रोका जा सकता है। प्रशासन ने विशेष रूप से बुजुर्गों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी वाले यात्रियों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। यात्रा में रोज 5,000 श्रद्धालुओं की सीमा तय करने का उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना और आपात स्थिति में बचाव कार्य आसान बनाना है।
बारिश ने बढ़ाई चुनौती
यात्रा शुरू होने से ठीक पहले चंबा और भरमौर क्षेत्र में भारी बारिश ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी थी। लगातार बारिश के कारण मार्ग के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा और सुरक्षा को देखते हुए यात्रा गतिविधियों पर अस्थायी रोक भी लगाई गई। प्रशासन ने श्रद्धालुओं को मौसम और रास्ते की स्थिति देखकर ही यात्रा करने तथा असुरक्षित मार्गों से बचने की सलाह दी है। पिछले वर्ष मणिमहेश यात्रा के दौरान खराब मौसम और प्राकृतिक आपदाओं से कई श्रद्धालुओं की जान गई थी। इस अनुभव को देखते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक कड़ी की गई है। यात्रा मार्ग पर पुलिस, होमगार्ड और बचाव दल तैनात किए जा रहे हैं। एक हजार से अधिक पुलिस और होमगार्ड कर्मियों की तैनाती की जानकारी प्रशासन ने दी है।
रास्ते में स्वास्थ्य सुविधाएं
हड़सर से मणिमहेश झील तक के मार्ग पर विभिन्न पड़ावों में चिकित्सा और सहायता केंद्र बनाए गए हैं। श्रद्धालुओं को बारिश, ठंड और ऊंचाई को ध्यान में रखते हुए गर्म कपड़े, मजबूत जूते, रेनकोट और जरूरी दवाएं साथ रखने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने निर्धारित मार्ग पर ही चलने और खराब मौसम में आगे बढ़ने से बचने को कहा है। हेलिकॉप्टर सेवा भी यात्रा अवधि में उपलब्ध रहेगी। इसके लिए ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि मौसम खराब होने की स्थिति में श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर रोका जा सके और जरूरत पड़ने पर तुरंत बचाव अभियान चलाया जा सके।