Summer express/मंडी-:राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के विजन को आगे बढ़ाते हुए सरकारी मॉडल हाई स्कूल (GMHS), मालोया कॉलोनी के टीजीटी साइंस (नॉन मेडिकल) शिक्षक ने सीमित संसाधनों में विज्ञान शिक्षा को नई पहचान दी है। मूल रूप से मंडी, हिमाचल प्रदेश से संबंधित इस शिक्षक का चयन राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए किया गया है। पिछले 16 वर्षों से मालोया कॉलोनी स्कूल में सेवाएं दे रहे शिक्षक ने नवाचारों के जरिए सरकारी शिक्षा में एक अलग उदाहरण पेश किया है।
कबाड़ से तैयार किए नवाचार मॉडल, प्रयोगात्मक शिक्षा को दी नई दिशा
उन्होंने कबाड़ और बेकार सामग्री का उपयोग कर विज्ञान सीखने के लिए कई मॉडल तैयार किए हैं। इनमें सीवी रमन डोम थिएटर, मोबाइल साइंस लैब और इंडिजिनस साइंस एंड नॉलेज पार्क प्रमुख हैं।टिन शीट, थर्मोकोल और पेपर स्क्रैप से तैयार सीवी रमन डोम थिएटर में विद्यार्थी 360 डिग्री इमर्सिव तकनीक के माध्यम से अंतरिक्ष और जैविक प्रक्रियाओं को समझते हैं। इसकी सफलता को देखते हुए समग्र शिक्षा अभियान ने इस मॉडल को चंडीगढ़ के छह अन्य सरकारी स्कूलों में भी लागू किया।मोबाइल साइंस लैब (Lab-on-Cart) के माध्यम से माइक्रोस्कोप, सर्किट बोर्ड और अन्य वैज्ञानिक उपकरण सीधे कक्षा तक पहुंचाए गए। वहीं स्कूल में विकसित साइंस पार्क में लो-कॉस्ट वेदर स्टेशन, सोलर वाटर हीटर, सी-सॉ वाटर पंप और अन्य कार्यशील मॉडल विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।शिक्षक ने डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने विद्या दान-दीक्षा प्लेटफॉर्म पर 149 से अधिक डिजिटल लर्निंग मॉड्यूल तैयार किए और पीएम ई-विद्या के लिए वीडियो लेसन रिकॉर्ड किए। इसके अलावा Explore Science Behind This गतिविधि पुस्तक भी तैयार की।उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल कीं। छात्रा सनेहा ने जापान के साकुरा साइंस हाई स्कूल कार्यक्रम में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जबकि छात्र पवन कुमार को राष्ट्रपति भवन में संवाद का अवसर मिला। छात्र अभिषेक मेहतो का चयन ISRO के युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम के लिए हुआ।
शिक्षक ने समुदाय आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मदर टेरेसा मालोया स्कूल हेल्प ग्रुप की स्थापना भी की, जिसके माध्यम से जरूरतमंद विद्यार्थियों को चिकित्सा सहायता, शैक्षणिक सामग्री और उच्च शिक्षा में सहयोग दिया गया।मंडी हिमाचल प्रदेश से निकलकर चंडीगढ़ के सरकारी स्कूल में शिक्षा के क्षेत्र में नई मिसाल कायम करने वाले इस शिक्षक का राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयन उनकी मेहनत, नवाचार और शिक्षा के प्रति समर्पण को दर्शाता है।