समर न्यूज | नई दिल्ली/चंडीगढ़
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने अंतरराष्ट्रीय नार्को-टेरर नेटवर्क का पर्दाफाश करने का दावा किया है। जांच में प्रतिबंधित खालिस्तान समर्थक आतंकवादी अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डल्ला से जुड़े कथित आतंक-वित्तपोषण और ड्रग्स के बदले हथियार पहुंचाने के नेटवर्क का पता चला है।
पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है और अलग-अलग बरामदगी में कुल 5.138 किलो अफीम जब्त की है। बरामद अफीम की कनाडा में अनुमानित कीमत करीब 3.5 करोड़ रुपये बताई गई है। पुलिस के अनुसार, जांच की शुरुआत सात फरवरी को हुई, जब दिल्ली के मोती नगर स्थित एक कूरियर केंद्र पर कनाडा भेजे जा रहे एक पार्सल को रोका गया।
पार्सल में खाद्य और घरेलू सामान घोषित किया गया था, लेकिन तलाशी में उसके भीतर विशेष रूप से तैयार की गई नकली तली के नीचे करीब 2.998 किलो अफीम छिपी मिली। इसके बाद पुलिस ने इसे केवल मादक पदार्थ की बरामदगी का मामला मानने के बजाय पूरे कूरियर नेटवर्क, डिजिटल उपकरणों और वित्तीय लेनदेन की जांच शुरू की।
पंजाब से राजस्थान तक फैला नेटवर्क
जांच आगे बढ़ने पर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में कार्रवाई की गई और दो अन्य खेपों से भी अफीम बरामद हुई। पुलिस ने बरनाला निवासी हरदीप सिंह, बठिंडा निवासी सिमरनजीत सिंह, हरियाणा के सिरसा निवासी यदविंदर सिंह उर्फ जसन संधू और राजस्थान के बालोतरा निवासी जीवन सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि हरदीप भारत में नेटवर्क के संचालन और अफीम की खरीद व भेजने का काम संभालता था। यदविंदर खरीद, पैकिंग और छिपाने के साथ विदेशी संपर्कों के बीच कड़ी का काम करता था।
ड्रग्स के बदले हथियार का आरोप
पुलिस के मुताबिक, भारत से अफीम कनाडा भेजी जाती थी और वहां बिक्री से मिले पैसे का इस्तेमाल कथित तौर पर अर्श डल्ला के नेटवर्क को चलाने तथा विदेशी हैंडलरों को भुगतान करने में किया जाता था। इसके बदले पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन के जरिए हथियार पहुंचाए जाने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि इस तरह मादक पदार्थों से होने वाली कमाई और हथियारों की तस्करी को एक-दूसरे से जोड़कर पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
फर्जी पहचान से कूरियर भेजे
जांच में कथित तौर पर फर्जी केवाईसी दस्तावेज, काल्पनिक भेजने वालों के नाम, एन्क्रिप्टेड संचार माध्यम और प्रॉक्सी या बेनामी बैंक खातों तथा यूपीआई माध्यमों के इस्तेमाल का भी पता चला है। पुलिस के अनुसार, अफीम को कभी कपड़ों और कभी खाद्य सामग्री के कार्टन में छिपाया जाता था। कूरियर श्रृंखला में कई बिचौलियों का इस्तेमाल कर असली संचालकों की पहचान छिपाने की कोशिश की जाती थी।