Summer express , सिरसा। जम्मू-कश्मीर के राजौरी में देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए सिरसा जिले के गांव कुत्ताबढ़ निवासी सेना के जवान सुखचैन सिंह का पार्थिव शरीर शनिवार सुबह पैतृक गांव पहुंचा। शहीद के अंतिम संस्कार की तैयारियों के बीच ग्रामीणों ने अंतिम यात्रा रोक दी और प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक शहीद के परिवार को नौकरी, आर्थिक सहायता और अन्य जरूरी सुविधाएं देने का ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
ग्रामीणों में प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी भी देखने को मिली। उनका आरोप है कि सुखचैन सिंह के शहीद होने के बाद तीन दिन बीत जाने के बावजूद कोई प्रशासनिक अधिकारी परिवार को सांत्वना देने गांव नहीं पहुंचा। इसी को लेकर ग्रामीणों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर शहीद के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, आर्थिक सहायता और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।
शनिवार सुबह करीब 10 बजे शहीद का पार्थिव शरीर सेना और जिला प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में गांव पहुंचा। अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर को कुछ समय के लिए रखा गया। इसके बाद राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाना था, लेकिन ग्रामीणों ने मांगें पूरी होने तक अंतिम यात्रा आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया।
शहीद के सम्मान में पूरा गांव एकजुट नजर आया। बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और स्कूली बच्चे तिरंगा लेकर गांव के प्रवेश द्वार पर पहुंचे। युवाओं ने बाइक पर तिरंगा यात्रा निकाली और शहीद के पार्थिव शरीर के साथ गांव पहुंचे। इस दौरान ‘शहीद सुखचैन अमर रहे’, ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से माहौल गूंज उठा। ग्रामीणों ने कहा कि वे शहीद के परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं और उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे।
सुखचैन सिंह 27 सितंबर 2015 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। वर्तमान में वह 59 इंजीनियरिंग रेजीमेंट में तैनात थे और राजौरी क्षेत्र में ड्यूटी कर रहे थे। गुरुवार को ड्यूटी के दौरान उन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी शहादत की खबर गांव पहुंचते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
सुखचैन सिंह के परिवार में उनकी पत्नी निर्मल कौर और पांच साल का बेटा है। दोनों की शादी वर्ष 2020 में हुई थी। बताया गया है कि सुखचैन सिंह ने बचपन में ही अपने पिता बलविंद्र सिंह को खो दिया था। उनके पिता का निधन उस समय हो गया था, जब सुखचैन की उम्र महज सात वर्ष थी। उनकी माता का नाम अमर कौर है। परिवार में उनके दो भाई और एक बहन भी हैं।
खराब मौसम के कारण पार्थिव शरीर को गांव तक पहुंचाने में भी देरी हुई। राजौरी से पार्थिव शरीर को हवाई मार्ग से पठानकोट लाया गया था, लेकिन मौसम खराब होने के कारण आगे की उड़ान संभव नहीं हो सकी। इसके बाद शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे पार्थिव शरीर को एंबुलेंस के माध्यम से सड़क मार्ग से सिरसा के लिए रवाना किया गया। शुक्रवार रात करीब 11 बजे पार्थिव शरीर सिरसा एयरफोर्स स्टेशन पहुंचा, जहां उसे रखा गया। शनिवार सुबह सेना और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पार्थिव शरीर को कुत्ताबढ़ गांव लाया गया।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी शहीद सुखचैन सिंह को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि राजौरी में देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए कुत्ताबढ़ निवासी जवान सुखचैन सिंह का बलिदान देश हमेशा याद रखेगा। उन्होंने जवान की वीरता और कर्तव्यनिष्ठा को नमन करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
फिलहाल शहीद के अंतिम संस्कार को लेकर ग्रामीणों और प्रशासन के बीच बातचीत जारी है। ग्रामीण अपनी मांगों पर कायम हैं और प्रशासन की ओर से दिए जाने वाले आश्वासन के बाद ही अंतिम संस्कार को लेकर अगला निर्णय लिया जाएगा।