Summer express , यमन। पश्चिमी यमन के ताइज़ और होदेइदाह प्रांतों में सरकारी सेना और हूती विद्रोहियों के बीच भीषण संघर्ष लगातार जारी है। पिछले चार दिनों से चल रही हिंसक झड़पों में अब तक कम से कम 117 लोगों के मारे जाने की खबर है। दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक क्षेत्रों पर कब्जे को लेकर जमीनी और हवाई स्तर पर संघर्ष तेज हो गया है।
पश्चिमी तट के मोर्चे पर सरकारी सेना के साथ तैनात एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के अनुसार, गुरुवार को संघर्ष शुरू होने के बाद से सरकारी बलों के 54 सैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य जवान घायल हुए हैं। दूसरी ओर, पश्चिमी होदेइदाह प्रांत में हूती नियंत्रण वाले अस्पतालों से जुड़े दो चिकित्सा सूत्रों ने 63 हूती लड़ाकों के मारे जाने की जानकारी दी है। इस तरह चार दिनों के संघर्ष में दोनों पक्षों के कुल 117 लोगों की जान जा चुकी है।
शुक्रवार को यमनी सरकार के लड़ाकू विमानों ने होदेइदाह और ताइज़ के हूती नियंत्रण वाले इलाकों में हवाई हमले किए। बताया गया कि ये कार्रवाई जमीनी मोर्चे पर लड़ रहे सरकारी सैनिकों को समर्थन देने के लिए की गई। सरकारी बल रणनीतिक बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य के आसपास हूती विद्रोहियों के बड़े हमले का सामना कर रहे हैं।
सैन्य सूत्रों के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान हूती लड़ाकों ने कई मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ते हुए कुछ क्षेत्रों में बढ़त हासिल कर ली थी। इसके बाद सरकारी सेना ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी। लड़ाकू विमानों ने उन इलाकों में हूती ठिकानों और उनकी गतिविधियों को निशाना बनाया, जहां दोनों पक्षों के बीच जमीनी लड़ाई चल रही थी। हालांकि हवाई हमलों में हुए नुकसान और अतिरिक्त हताहतों को लेकर तत्काल विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी।
सरकारी सेना के एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि पश्चिमी ताइज़ में रातभर चली जवाबी कार्रवाई के दौरान सरकारी बलों ने कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर दोबारा नियंत्रण हासिल कर लिया। इन स्थानों पर हूती लड़ाकों ने कुछ घंटे पहले ही कब्जा किया था।
पश्चिमी यमन में जारी यह संघर्ष हाल के वर्षों की सबसे भीषण जमीनी लड़ाइयों में शामिल माना जा रहा है। कई मोर्चों पर लंबे समय से बनी अपेक्षाकृत शांति के बाद बड़े पैमाने पर फिर से हिंसा शुरू होने की आशंका बढ़ गई है।
यमन वर्ष 2014 के अंत से गृहयुद्ध जैसी स्थिति से जूझ रहा है। उस समय हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था। इसके बाद वर्ष 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया था। अब ताइज़ और होदेइदाह में तेज हुए संघर्ष ने एक बार फिर यमन में व्यापक हिंसा की आशंका बढ़ा दी है।