लक्की मेहता/राहुल शर्मा
लुधियाना |समर न्यूज
लुधियाना और इसके आसपास के इलाकों में रियल एस्टेट बाजार में इन दिनों तेजी दिखाई दे रही है। नए कमर्शियल और रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग, आकर्षक विज्ञापन और भविष्य में भारी मुनाफे के दावों के बीच निवेशकों की भीड़ जुटाने की कोशिश हो रही है। हालांकि, इस तेजी के पीछे अपनाई जा रही कुछ कथित रणनीतियों ने बाजार की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रियल एस्टेट से जुड़े सूत्रों का दावा है कि कुछ प्रोजेक्ट्स में रेरा पंजीकरण नंबर मिलने से पहले ही टोकन मनी लेकर बुकिंग शुरू करने, फिर कुछ ही दिनों में कीमत बढ़ाकर प्रॉपर्टी की मांग को तेज दिखाने का खेल चल रहा है। आरोप है कि पहले सीमित रकम लेकर निवेशकों को जोड़ा जाता है और बाद में कीमत बढ़ने की जानकारी देकर दूसरे खरीदारों में भी जल्द निवेश करने का दबाव बनाया जाता है।
कुछ प्रोजेक्ट्स में ग्राहकों से शुरुआती तौर पर कुछ लाख रुपये तक की टोकन मनी लेकर बुकिंग किए जाने के दावे सामने आए हैं। इसके बाद एक-दो सप्ताह के भीतर ही प्रॉपर्टी के रेट में ₹500 से ₹1,000 प्रति वर्गफुट तक बढ़ोतरी किए जाने की बात कही जा रही है। इससे नए ग्राहक को यह संदेश जाता है कि प्रोजेक्ट की कीमत लगातार बढ़ रही है और देर करने पर प्रॉपर्टी महंगी हो जाएगी। बाजार में इसे ‘फियर ऑफ मिसिंग आउट’ यानी फोमो की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
{प्राइम लोकेशन में करोड़ों के एससीओ, बाहरी इलाकों में आधे से भी कम कीमत: रियल एस्टेट बाजार से जुड़े लोगों के अनुसार शहर के प्रमुख और पॉश इलाकों में करीब 900 से 1,000 वर्गफुट के एससीओ की कीमत 3 से 4 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है। वहीं, बाहरी बाईपास और लिंक रोड के आसपास विकसित हो रहे समान आकार के प्रोजेक्ट्स में कीमतें इसके मुकाबले काफी कम होने का दावा किया जा रहा है। लोकेशन, सड़क, कमर्शियल संभावनाएं, डेवलपमेंट और सुविधाओं के कारण कीमतों में अंतर स्वाभाविक है, लेकिन बहुत अधिक अंतर होने पर निवेशकों को प्रोजेक्ट की वास्तविक कीमत और भविष्य की मांग का स्वतंत्र आकलन जरूर करना चाहिए।
{एसी ऑफिस में ‘काउंसलिंग’, ग्राफ दिखाकर समझाया जा रहा बड़ा मुनाफा: नए प्रोजेक्ट्स की बिक्री के लिए अब पारंपरिक दलाली से आगे बढ़कर कॉरपोरेट स्टाइल की मार्केटिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। आलीशान और वातानुकूलित कार्यालयों में सेल्स एग्जीक्यूटिव ग्राहकों को भविष्य में प्रॉपर्टी के दाम बढ़ने के अनुमान, रिटर्न के आंकड़े और संभावित मुनाफे के ग्राफ दिखाकर निवेश के लिए प्रेरित कर रहे हैं। कुछ प्रोजेक्ट्स में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए साइट पर लंच-डिनर से लेकर होटल में हॉस्पिटैलिटी तक की व्यवस्था किए जाने के दावे भी सामने आए हैं।
{रेरा नंबर से पहले बुकिंग पर सबसे बड़ा सवाल: इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल रेरा पंजीकरण से पहले बुकिंग और रकम लेने को लेकर है। रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 की धारा 3 के तहत संबंधित प्रोजेक्ट का पंजीकरण किए बिना प्रमोशन और बिक्री से जुड़ी गतिविधियों पर गंभीर कानूनी प्रतिबंध हैं। ऐसे में यदि किसी प्रोजेक्ट में रेरा पंजीकरण से पहले विज्ञापन, बुकिंग या रकम लेने की बात सामने आती है तो इसकी वैधानिकता की जांच जरूरी हो जाती है। यही वजह है कि निवेशकों को किसी भी प्रोजेक्ट में रकम लगाने से पहले उसका रेरा पंजीकरण और संबंधित दस्तावेज स्वयं सत्यापित करने चाहिए।
{डीलरों को 3 से 8 प्रतिशत कमीशन, कुछ प्रोजेक्ट्स में 10 प्रतिशत तक के दावे: एक प्रॉपर्टी डीलर ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि कुछ बड़े लैंड डेवलपर्स प्रोजेक्ट की बिक्री बढ़ाने के लिए डीलरों और ब्रोकर्स को 3 से 8 प्रतिशत तक कमीशनदे रहे हैं। कुछ नए प्रोजेक्ट्स में यह कमीशन 10 प्रतिशत तक पहुंचने का भी दावा किया गया है। डीलरों को कमीशन के अलावा विदेशी ग्रुप ट्रिप और महंगे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जैसे इंसेंटिव दिए जाने की बातें भी सामने आई हैं। यदि ये दावे सही हैं तो इससे यह सवाल उठता है कि ग्राहक को प्रॉपर्टी उसकी जरूरत और वास्तविक मूल्य के आधार पर दिखाई जा रही है या अधिक कमीशन वाले प्रोजेक्ट की ओर मोड़ा जा रहा है।
{कैश लेनदेन के आरोप भी गंभीर: कुछ बाजार सूत्रों ने रियल एस्टेट सौदों में बड़े स्तर पर नकद लेनदेन होने के आरोप लगाए हैं। सरकारी शुल्क और करों से बचने के लिए खरीदारों को रकम का एक हिस्सा नकद देने के लिए प्रेरित किए जाने के दावे भी किए गए हैं।
कद लेनदेन व कथित ब्लैक मनी से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। यदि किसी प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर अघोषित नकदी का इस्तेमाल हो रहा है तो यह केवल रियल एस्टेट नियमन ही नहीं, बल्कि आयकर और अन्य संबंधित कानूनों के तहत भी गंभीर जांच का विषय बन सकता है।