summer express , चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने आर्म्स लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए अहम बदलाव किया है। गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब वेपन ट्रेनिंग सर्टिफिकेट (फॉर्म एस-1) के लिए ट्रेनिंग स्लॉट उन्हीं आवेदकों को मिलेगा, जिनके आर्म्स लाइसेंस आवेदन को पहले ‘इन-प्रिंसिपल अप्रूवल’ यानी सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी होगी।
गृह विभाग की ओर से इस संबंध में दो अलग-अलग आदेश जारी किए गए हैं। विभाग के पहले आदेश में कहा गया कि वेपन ट्रेनिंग स्लॉट की बढ़ती मांग को देखते हुए ऐसे आवेदकों को ट्रेनिंग का अवसर नहीं दिया जाए, जिनके आर्म्स लाइसेंस आवेदन को अभी तक सैद्धांतिक मंजूरी नहीं मिली है।
इसके बाद 30 जुलाई 2026 को जारी दूसरे आदेश में नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी), हरियाणा को ऑनलाइन पोर्टल में जरूरी बदलाव करने के निर्देश दिए गए। इसका उद्देश्य नई व्यवस्था को डिजिटल प्रणाली में लागू करना है, ताकि ट्रेनिंग स्लॉट का आवंटन केवल पात्र आवेदकों को ही किया जा सके।
गृह विभाग के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में कई ऐसे लोगों को भी हथियार चलाने की ट्रेनिंग मिल रही थी, जिनके लाइसेंस आवेदन बाद में मंजूर नहीं हो पाते थे। इससे एक ओर ट्रेनिंग संसाधनों का अनावश्यक इस्तेमाल हो रहा था, वहीं दूसरी ओर वास्तविक और पात्र आवेदकों को स्लॉट हासिल करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
पोर्टल में बदलाव के बाद आर्म्स लाइसेंस की प्रक्रिया में नया क्रम प्रभावी होगा। पहले आवेदन की जांच के बाद उसे सैद्धांतिक मंजूरी दी जाएगी और इसके बाद ही संबंधित आवेदक को वेपन ट्रेनिंग के लिए स्लॉट उपलब्ध कराया जाएगा। इससे उन आवेदकों को प्राथमिकता मिलेगी, जिनके लाइसेंस आवेदन प्रक्रिया में आगे बढ़ चुके हैं।
मैनुअल प्रक्रिया फिलहाल जारी रहेगी
गृह विभाग ने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए हैं कि ऑनलाइन पोर्टल में आवश्यक बदलाव पूरी तरह लागू होने तक वेपन ट्रेनिंग के लिए मैनुअल प्रक्रिया जारी रखी जाए। यानी पोर्टल में संशोधन होने तक पात्र आवेदकों को मौजूदा मैनुअल व्यवस्था के तहत ट्रेनिंग स्लॉट दिए जाते रहेंगे।
सरकार के इस फैसले से आर्म्स लाइसेंस प्रक्रिया में अनावश्यक आवेदनों के कारण होने वाली भीड़ कम होने की उम्मीद है। साथ ही, ट्रेनिंग स्लॉट और अन्य संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद लाइसेंस प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड भी अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित होगा।