{ड्रेनेज विभाग, गमाडा और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
{जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं लोग
गुरमीत सिंह | डेराबस्सी
समर न्यूज
गांव सुंडरा से मोर-ठीकरी की ओर जाने वाले रास्ते में नदी पर बना पक्का पुल करीब तीन साल पहले बाढ़ की चपेट में आने से टूट गया था। इसके बाद आज तक पुल का दोबारा निर्माण नहीं हो सका। पुल टूटने के कारण आसपास के दर्जनों गांवों और कॉलोनियों के लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बारिश के दिनों में नदी का बहाव तेज होने पर लोग जान जोखिम में डालकर पानी के बीच से निकलने को मजबूर हैं। इलाका निवासियों के अनुसार रामगढ़ सड़क के रास्ते हरियाणा की सीमा से लगते पंजाब के अंतिम गांवों तक जाने के लिए मुबारिकपुर होकर जाना पड़ता है। सुंडरां से मोर-ठीकरी की ओर जाने वाला रास्ता अपेक्षाकृत छोटा है, लेकिन बीच में नदी होने के कारण बरसात के दौरान लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं।
अवैध कॉलोनियों के प्लॉट बेचने के लिए बनाया था पुल!
लोगों का आरोप है कि नदी के दूसरी तरफ विकसित की गई अवैध कॉलोनियों में प्लॉट बेचने के लिए बिल्डरों ने नदी पर सीमेंट का पक्का पुल बनवाया था। पुल की सुविधा देखकर लोगों ने वहां प्लॉट खरीदे और घर बनाकर रहना शुरू कर दिया। करीब तीन साल पहले बाढ़ के दौरान पुल टूट गया। इसके बाद बिल्डरों की कथित हकीकत सामने आई और प्लॉट बेचने के बाद वे वहां से गायब हो गए।
सरकारी रिकॉर्ड में पुल का कोई उल्लेख नहीं
निवासियों का कहना है कि नदी पर बने इस पक्के पुल से संबंधित सरकारी रिकॉर्ड में न तो कोई विवरण मिलता है और न ही इसकी मंजूरी सामने आई है। लोगों ने सवाल उठाया कि यदि बरसाती नाले या नदी के प्राकृति क बहाव में रुकावट डालना नियमों के विरुद्ध है तो यह पुल किसकी अनुमति से बनाया गया था और इसकी जांच क्यों नहीं की गई?
पुल न होने से तय करना पड़ता है लंबा रस्ता
बारिश के दौरान नदी का बहाव इतना तेज हो जाता है कि इसे पार करना बेहद मुश्किल हो जाता है। पिछले दिनों भी तेज बहाव में कुछ लोग बहते-बहते बचे। बच्चों समेत इलाके के लोग रोजाना इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। उनका कहना है कि बारिश न होने पर भी नदी में पानी बहता रहता है और अचानक जलस्तर बढ़ने का खतरा बना रहता है। पुल टूटने के कारण लोगों को दूसरे रास्ते से जाने के लिए कई किलोमीटर का अतिरिक्त सफर करना पड़ता है।
ड्रेनेज विभाग, गमाडा और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर
उठे सवाल
निवासियों ने ड्रेनेज विभाग, गमाडा और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कथित मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि इलाके में दर्जनों कॉलोनियां बिना जरूरी मंजूरियों के विकसित हुई हैं तो संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।
लोगों ने सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाकर जिम्मेदारी तय करने तथा टूटे पुल की जगह सुरक्षित आवागमन का स्थायी प्रबंध करने की मांग की है। पुल टूटने से आसपास के गांवों का आपसी संपर्क प्रभावित होने के कारण लोगों में प्रशासन के प्रति रोष बढ़ रहा है।