summer express, अमरावती। आंध्र प्रदेश के पुत्तलुरू क्षेत्र में सूखे के चलते जल संकट गंभीर होता जा रहा है। इसका असर अब धार्मिक गतिविधियों पर भी दिखाई देने लगा है। चित्रावती नदी पूरी तरह सूख चुकी है और नदी की धारा की जगह अब दूर तक केवल रेत दिखाई दे रही है। स्थिति यह है कि गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए भी लोगों के सामने संकट खड़ा हो गया।
हर साल जिस चित्रावती नदी में गणेश चतुर्थी के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन करते थे, इस बार वहां पानी नहीं है। ऐसे में लोगों ने मजबूरी में सूखी नदी की रेत में ही गणेश प्रतिमाएं रखकर विदाई दी। इस दृश्य ने क्षेत्र में बने सूखे के गंभीर हालात को उजागर कर दिया।
पुत्तलुरू में सूखे की स्थिति के पीछे मानसून की कमी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। इस साल आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश दर्ज होने के कारण जल स्रोतों पर दबाव बढ़ गया। लगातार कम बारिश के चलते तालाबों और जलाशयों में पानी का स्तर घटा, वहीं भूजल का पर्याप्त पुनर्भरण भी नहीं हो सका।
स्थानीय स्तर पर कृषि और घरेलू जरूरतों के लिए बोरवेल पर बढ़ती निर्भरता ने भी स्थिति को गंभीर बनाया है। रिपोर्ट के मुताबिक क्षेत्र में बड़ी संख्या में बोरवेल सूख चुके हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या बढ़ गई है।
इसके अलावा जलाशयों के रखरखाव और जल प्रबंधन से जुड़ी कमियों को भी सूखे के प्रभाव को बढ़ाने वाला कारण बताया जा रहा है। समय पर सिंचाई और पेयजल के लिए पर्याप्त पानी का भंडारण एवं वितरण नहीं होने से कृषि के साथ-साथ आम लोगों की दैनिक जरूरतें भी प्रभावित हो रही हैं।
सूखे की वजह से चित्रावती नदी का सूखना क्षेत्र में जल संकट की गंभीर तस्वीर पेश कर रहा है। नदी में पानी नहीं होने से जहां स्थानीय लोगों की परेशानियां बढ़ी हैं, वहीं इस बार गणेश विसर्जन के लिए भी लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था तलाशनी पड़ी।