summer express , चंडीगढ़। पंजाब में सरकारी बसों की सेवाएं मंगलवार 22 सितंबर को प्रभावित रहने की संभावना है। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन (पंजाब 25/11) ने अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया है। यूनियन के मुताबिक, हड़ताल के चलते पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी की 2700 से अधिक बसों का संचालन प्रभावित हो सकता है। करीब 5500 चालक और परिचालक भी हड़ताल में शामिल होने का दावा किया गया है। इससे रोजाना सरकारी बसों से सफर करने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने चंडीगढ़ में कहा कि कर्मचारी पिछले साढ़े चार साल से अपनी मांगों को लेकर सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं। उनके अनुसार इस अवधि में 60 से अधिक बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में ठेका कर्मचारियों को नियमित करना, ठेकेदारी व्यवस्था खत्म करना और नियमित कर्मचारियों के समान वेतन व सुविधाएं देना शामिल है।
यूनियन नेताओं का आरोप है कि सरकार ने सत्ता में आने से पहले ठेका कर्मचारियों को नियमित करने का भरोसा दिया था, लेकिन परिवहन विभाग में अब तक किसी भी कर्मचारी को नियमित नहीं किया गया। महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों ने सरकारी बसों का बेड़ा बढ़ाने के बजाय किलोमीटर योजना को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में करीब 800 सरकारी बसें कंडम हो चुकी हैं और उनकी जगह पर्याप्त संख्या में नई बसें नहीं खरीदी गईं। इससे कई सरकारी रूट प्रभावित हो रहे हैं। यूनियन नेताओं ने सरकार से नई बसों की खरीद बढ़ाने और किलोमीटर योजना पर रोक लगाने की मांग की है।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरकेश कुमार विक्की ने आंदोलन के दौरान कर्मचारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और जेल में बंद कर्मचारियों को रिहा करने की मांग उठाई। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
यूनियन के अनुसार, आगे मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के आवास के बाहर धरना देने के साथ सरकार की राजनीतिक रैलियों के बहिष्कार का भी फैसला लिया जा सकता है।
यात्रियों को सलाह दी गई है कि मंगलवार को सरकारी बस से यात्रा करने से पहले सेवा की स्थिति की जानकारी जरूर लें। दूसरे जिलों में जाने वाले यात्रियों को संभावित बस बंदी को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक परिवहन की व्यवस्था करनी पड़ सकती है।
यूनियन की प्रमुख मांगों में ठेका कर्मचारियों का नियमितीकरण, ठेकेदारी व्यवस्था समाप्त करना, समान काम के लिए समान वेतन और सरकारी सुविधाएं देना, नई सरकारी बसों की खरीद बढ़ाना, किलोमीटर योजना पर रोक लगाना, आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस लेना और गिरफ्तार कर्मचारियों की रिहाई शामिल हैं।