Summer express/चिंतपूर्णी,विकास-: चिंतपूर्णी मंदिर के समीप एक बैल के गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिलने के बाद स्थानीय लोगों ने मानवीय पहल करते हुए उसकी मदद के लिए हाथ बढ़ाया। ग्रामीणों के अनुसार, घायल बैल काफी देर तक सड़क किनारे तड़पता रहा, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचकर उसे प्राथमिक उपचार दिया और तेज धूप से बचाने के लिए छाया की व्यवस्था की।
मामले की जानकारी मिलने पर फायर ब्रिगेड के कर्मचारी भी वाहन लेकर मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने मंदिर न्यास से आग्रह किया कि घायल बैल को मंदिर न्यास की गौशाला में पहुंचाकर उसका उपचार और उचित देखभाल करवाई जाए। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला तक ले जाने के लिए उन्हें मंदिर प्रशासन की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया।घायल पशु को धूप से राहत दिलाने के लिए राजन कालिया और विकास भारद्वाज ने फायर ब्रिगेड कर्मचारियों के सहयोग से मौके पर छायामान की व्यवस्था करवाई। स्थानीय लोग इसके बाद भी अपने स्तर पर घायल बैल की देखभाल में जुटे रहे।पूर्व प्रधान संजय कालिया ने कहा कि मंदिर प्रशासन से कई बार आग्रह किया गया कि घायल बैल को न्यास की गौशाला में ले जाकर उपचार उपलब्ध करवाया जाए। उनका आरोप है कि इसके बावजूद इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।ग्रामीणों ने कहा कि चिंतपूर्णी मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है और यहां सेवा व करुणा की भावना को विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसे में मंदिर परिसर के आसपास किसी घायल या असहाय पशु के मिलने पर उसके उपचार और संरक्षण के लिए त्वरित व्यवस्था होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों ने मंदिर न्यास से मामले को गंभीरता से लेते हुए यह स्पष्ट करने की मांग की है कि घायल बैल को गौशाला तक पहुंचाने में क्या कठिनाई सामने आई और ऐसी परिस्थितियों में पशुओं की सहायता के लिए न्यास की क्या व्यवस्था है।ग्रामीणों ने मांग की कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए मंदिर प्रशासन एक स्पष्ट और त्वरित व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि घायल पशुओं को समय पर उपचार और सुरक्षित स्थान मिल सके।