Summer express/शिमला,संजू-:शिमला में बंदरों का आतंक लोगों के लिए लगातार परेशानी का सबब बनता जा रहा है। शहर के कुसुम्पटी वार्ड में पिछले पांच महीनों के दौरान बंदरों के हमले और काटने के करीब 15 मामले सामने आए हैं। बंदरों की बढ़ती संख्या और लगातार हो रही घटनाओं को देखते हुए अब वन विभाग और वाइल्डलाइफ विभाग ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। प्रभावित इलाकों में पिंजरे लगाकर बंदरों को पकड़ने की योजना बनाई जा रही है। परिणामहल चौक समेत आसपास के क्षेत्र इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं।
कुसुम्पटी वार्ड में बंदरों के बढ़ते आतंक ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। वार्ड पार्षद रचना झीना शर्मा के मुताबिक, पिछले चार से पांच महीनों में बंदरों के काटने और हमले के करीब 15 मामले सामने आ चुके हैं। उनका कहना है कि इस गंभीर समस्या को नगर निगम की बैठकों में लगातार उठाया गया, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया।पार्षद के अनुसार,परिणामहल चौक और इसके आसपास के क्षेत्र बंदरों की समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यहां आए दिन बंदरों के झुंड नजर आते हैं, जिससे स्थानीय लोगों, राहगीरों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। समस्या का समाधान नहीं होने पर पार्षद ने अन्य पार्षदों के साथ वन विभाग के अधिकारियों से मुलाकात कर बंदरों को पकड़ने की मांग उठाई।इसके बाद फॉरेस्ट और वाइल्डलाइफ विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। अब बंदरों को पकड़ने के लिए चिन्हित स्थानों पर पिंजरे लगाने की तैयारी की जा रही है।
पार्षद का कहना है कि वन विभाग की ओर से पिंजरे लगाने के लिए फंड उपलब्ध करवाने की बात कही गई है।हालांकि, नगर निगम के पास पिंजरे लगाने के लिए करीब दो से ढाई लाख रुपये का बजट उपलब्ध नहीं होने का दावा भी पार्षद ने किया है। उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा सबसे अहम है और इस समस्या के समाधान के लिए संबंधित विभागों को मिलकर प्रभावी कदम उठाने चाहिए।पार्षद ने स्थानीय लोगों से भी अपील की है कि खुले में खाने-पीने की चीजें न फेंकें और कूड़े को खुले में न छोड़ें। उनका कहना है कि भोजन की उपलब्धता के कारण बंदरों का जमावड़ा बढ़ता है। अब पिंजरे लगाए जाने के बाद बंदरों की धरपकड़ शुरू होने से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।