समर न्यूज | मानसा
पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की मंगलवार सुबह गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना एक मेडिकल स्टोर पर हुई, जहां कथित तौर पर नशीले पदार्थों की बिक्री को लेकर झोटा और दुकान संचालक अश्वनी कुमार के बीच विवाद हुआ।
इसी दौरान गोलीबारी में झोटा की मौत हो गई, जबकि उनके चार साथी घायल हो गए। पूरी घटना झोटा के फेसबुक पेज पर चल रहे लाइव प्रसारण में कैद हो गई। घायलों को मानसा के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने झोटा को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक के अनुसार, उन्हें तीन गोलियां लगी थीं। मामले में पुलिस ने पहली गिरफ्तारी की है। मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार को फरार होने में मदद करने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस फरार आरोपी की तलाश कर रही है और उसकी गिरफ्तारी के लिए जांच तेज कर दी गई है।
झोटा और आरोपी के बीच वर्ष 2023 से विवाद चल रहा था। उस समय झोटा और उनके समर्थकों ने अश्वनी कुमार पर प्रतिबंधित नशीले कैप्सूल बेचने का आरोप लगाते हुए उसे जूतों की माला पहनाकर बाजार में घुमाया था।
परिवार और समर्थकों का प्रदर्शन, पुलिस बल तैनात
हत्या के बाद सिविल अस्पताल के बाहर झोटा के परिजनों और समर्थकों की भीड़ जुट गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और मानसा के तीनकोनी चौक पर यातायात बाधित किया। परिवार ने न्याय मिलने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होने तक अंतिम संस्कार नहीं करने की बात कही। झोटा के पिता भीम सेन ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर नशे के कारोबार को रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। हालांकि, नशा तस्करों के साथ पुलिस या प्रशासन की मिलीभगत के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया।
{विपक्ष ने सरकार को घेरा: घटना के बाद शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, भाजपा नेताओं केवल सिंह ढिल्लों और सुनील जाखड़ तथा कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था और नशा विरोधी अभियान पर सवाल उठाए। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि नशे के खिलाफ काम करने वाले व्यक्ति की हत्या सरकार की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जाखड़ ने दवाओं की अवैध बिक्री रोकने में औषधि निरीक्षकों की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए। ये विपक्षी दलों के राजनीतिक आरोप हैं।
{मुख्यमंत्री ने बुलाई बैठक: हत्या के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सभी जिलों के उपायुक्तों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। घटना ऐसे समय हुई है, जब पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। 30 सितंबर को जालंधर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब को 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त बनाने का लक्ष्य घोषित किया था। झोटा की हत्या ने नशे की आपूर्ति रोकने, दवाओं की दुकानों की निगरानी और नशे के खिलाफ काम करने वालों की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
मनसा अस्पताल का गेट फांदकर अंदर पहुंचे रवनीत बिट्टू: भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को मंगलवार को मानसा के सिविल अस्पताल में प्रवेश से रोके जाने पर वह मुख्य गेट फांदकर परिसर में पहुंच गए। वह नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे थे। बिट्टू ने पंजाब की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में भय व अराजकता का माहौल है।