Summer express, जींद। जुलाना से कांग्रेस विधायक और अंतरराष्ट्रीय पहलवान विनेश फोगाट ने महिला सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने वीरवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित करते हुए अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय मिलने में हो रही देरी पर चिंता जताई। विनेश ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि किसी बेटी की मौत के बाद उसके माता-पिता को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ता है, जबकि सत्ता में बैठे लोगों को उनकी पीड़ा का एहसास तक नहीं होता।
विनेश फोगाट ने अपनी पोस्ट में लिखा कि देश में दुष्कर्म के आरोपियों का फूल-मालाओं से स्वागत किया जाता है और प्रभावशाली पदों पर बैठे लोगों की आड़ में उन्हें संरक्षण मिलने के आरोप सामने आते हैं। वहीं, अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग करने वाले परिवारों को वर्षों तक संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कब तक बेटियों के परिवार न्याय के लिए भटकते रहेंगे और जिम्मेदार लोग अपनी जवाबदेही से बचते रहेंगे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित करते हुए विनेश ने कहा कि राष्ट्रपति स्वयं एक महिला हैं और उन्हें देश की बेटियों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि महिलाओं की सुरक्षा और उन्हें न्याय दिलाने के लिए अब तक क्या प्रयास किए गए हैं। विनेश ने अपनी पोस्ट के साथ एक समाचार चैनल पर प्रसारित अंकिता भंडारी के माता-पिता के वीडियो को भी रीट्वीट किया और उनके लिए न्याय की मांग की।
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले की रहने वाली थी। 19 वर्षीय अंकिता ऋषिकेश के पास एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी। 18 सितंबर 2022 को वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। छह दिन बाद उसका शव नहर से बरामद हुआ था। इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश पैदा किया था और महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठे थे।
अंकिता के माता-पिता ने मामले की जांच और एक प्रभावशाली व्यक्ति की कथित भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। परिवार निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग करता रहा है। हाल के दिनों में भी उन्होंने अपनी मांगों को लेकर धरना दिया था। इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी उनसे मुलाकात की थी।
विनेश फोगाट की पोस्ट ने एक बार फिर अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को चर्चा में ला दिया है। उन्होंने अपने संदेश के जरिए सवाल उठाया कि पीड़ित परिवारों को न्याय के लिए लंबे समय तक संघर्ष क्यों करना पड़ता है और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभाने वाले संस्थानों की जवाबदेही कैसे तय की जाएगी।