हंसराज के विरोध में उठने लगी आवाजें, 2027 के टिकट को लेकर बढ़ी खींचतान; वायरल वीडियो ने बढ़ाई भाजपा की चिंता
Summer express/चंबा, मंजूर पठान-: हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अभी भले ही समय बाकी हो, लेकिन राजनीतिक दलों के भीतर टिकट की दौड़ और संभावित उम्मीदवारों को लेकर गतिविधियां तेज होती नजर आने लगी हैं। जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में टिकट के दावेदार भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुट गए हैं। चंबा जिला का चुराह विधानसभा क्षेत्र भी अब इसी राजनीतिक हलचल के केंद्र में आता दिखाई दे रहा है।
चुराह में भाजपा की अंदरूनी राजनीति उस समय चर्चा में आ गई, जब नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के दौरे के दौरान ही कुछ समर्थकों की ओर से मौजूदा भाजपा नेता हंसराज के विरोध में नारेबाजी और नरेश रावत के समर्थन में नारे लगाए जाने का वीडियो सामने आया। वीडियो में कथित तौर पर “जयराम और हंसराज के सामने, चुराह का नेता कैसा हो, नरेश रावत जैसा हो” जैसे नारे सुनाई दे रहे हैं। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे लेकर चुराह की भाजपा राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर इन दिनों चंबा जिला के दौरे पर हैं और विभिन्न क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों तथा पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद कर आगामी विधानसभा चुनावों की संभावनाओं को टटोल रहे हैं। इसी राजनीतिक माहौल के बीच चुराह में सामने आया यह घटनाक्रम भाजपा के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यहां टिकट को लेकर संभावित दावेदारों के बीच अंदरूनी प्रतिस्पर्धा पहले से ही चर्चा का विषय बनी हुई है।
हंसराज बनाम नरेश रावत की चर्चा तेज
चुराह विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के भीतर हंसराज और नरेश रावत को लेकर राजनीतिक चर्चाएं लगातार जोर पकड़ रही हैं। एक तरफ हंसराज का अपना राजनीतिक आधार और समर्थक वर्ग है, वहीं दूसरी तरफ नरेश रावत को भी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए टिकट के प्रबल दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में जयराम ठाकुर जैसे पार्टी के शीर्ष नेता के सामने ही नरेश रावत के समर्थन में नारेबाजी होना राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
इस घटनाक्रम ने एक सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या चुराह भाजपा में सब कुछ ठीक चल रहा है? क्या आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट को लेकर पार्टी के भीतर खींचतान और तेज हो सकती है? और क्या पार्टी नेतृत्व के सामने अब चुराह में नए चेहरे और पुराने नेतृत्व के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती बनने वाला है?
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया है। वीडियो में समर्थकों की ओर से नरेश रावत के समर्थन में नारे लगाए जाते दिखाई दे रहे हैं। खास बात यह है कि यह घटनाक्रम उस समय सामने आया, जब पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पार्टी कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद कर रहे थे।राजनीतिक जानकारों की नजर में किसी बड़े नेता के दौरे के दौरान इस तरह की नारेबाजी केवल सामान्य राजनीतिक उत्साह नहीं मानी जाती, बल्कि इसे क्षेत्र में बन रहे राजनीतिक समीकरणों के संकेत के तौर पर भी देखा जा सकता है। हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति या समूह की अंतिम राजनीतिक स्थिति तय करना उचित नहीं होगा, लेकिन इतना जरूर है कि इसने चुराह की भाजपा राजनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
2027 से पहले भाजपा के सामने चुनौती
विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अभी राजनीतिक दलों के पास काफी समय है, लेकिन टिकट के दावेदारों की सक्रियता से साफ है कि चुनावी तैयारियां अंदरखाने शुरू हो चुकी हैं। चुराह जैसे विधानसभा क्षेत्र में जहां राजनीतिक मुकाबला हमेशा महत्वपूर्ण रहा है, वहां टिकट को लेकर होने वाली हर गतिविधि का असर आने वाले समय में पार्टी की रणनीति पर पड़ सकता है।
भाजपा नेतृत्व के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि टिकट के संभावित दावेदारों और उनके समर्थकों को किस तरह एकजुट रखा जाए। यदि चुनाव से पहले ही पार्टी के भीतर अलग-अलग नेताओं के समर्थन में गुटबाजी खुलकर सामने आती है, तो इसका असर चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है।
क्या चुराह में बदलेगा नेतृत्व का चेहरा?
नरेश रावत के समर्थन में सामने आई नारेबाजी ने अब एक और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या चुराह विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की मांग जोर पकड़ रही है? या फिर यह केवल कुछ समर्थकों की राजनीतिक भावनाओं तक सीमित मामला है?
फिलहाल इसका जवाब आने वाले दिनों में ही स्पष्ट होगा। लेकिन जिस तरह से नरेश रावत के समर्थन में नारे लगाए गए और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, उससे यह जरूर संकेत मिलता है कि चुराह में भाजपा के भीतर टिकट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं।अब सबकी निगाहें भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर हैं कि पार्टी चुराह में सामने आ रही इस अंदरूनी खींचतान को किस तरह संभालती है और 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए किस चेहरे पर दांव खेलती है।फिलहाल चुराह की राजनीति में एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है—क्या 2027 में भाजपा पुराने चेहरे पर भरोसा जताएगी या नरेश रावत जैसे नए दावेदार को मौका देकर राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश करेगी?
आने वाले दिनों में चुराह की भाजपा राजनीति में होने वाली बैठकों, कार्यकर्ताओं के रुख और पार्टी नेतृत्व के संकेत इस सवाल का जवाब देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।