शगुन कश्यप। चंडीगढ़
समर न्यूज
सड़क हादसे में 16 साल की बेटी को खोने वाले परिवार ने दुख की इस घड़ी में ऐसा फैसला लिया, जिसने कई लोगों को नई जिंदगी की उम्मीद दी। बेटी की किडनी, पैंक्रियाज और आंखें दान की गईं।
परिवार की इस मिसाल को पीजीआई के वरिष्ठ अधिकारी ने समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि अपने दुख से ऊपर उठकर दूसरों की जिंदगी बचाने का फैसला लेना आसान नहीं होता। ऐसे परिवारों को नमन है, जो इस मुश्किल समय में भी समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि देश में हर साल सड़क हादसों के कारण करीब दो लाख लोगों की मौत होती है। यह एक बड़ी त्रासदी है, लेकिन ऐसे हादसों में जान गंवाने वाले लोगों के अंगदान से दूसरे जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन दिया जा सकता है।
तीन बार लगातार मिला सर्वश्रेष्ठ सेंटर का सम्मान: उन्होंने बताया कि मृतक व्यक्ति के अंगदान यानी डीसिज्ड डोनर ट्रांसप्लांटेशन के मामले में भारत में अभी काफी काम करने की जरूरत है। हालांकि, इस दिशा में सुधार हो रहा है। पीजीआई को लगातार तीन बार देश के सर्वश्रेष्ठ आरओटीटीओ सेंटर का अवॉर्ड मिला है। उन्होंने कहा कि संस्थान में अंगदान को केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनआंदोलन बनाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिल सके।
आयुष्मान भारत से गरीब मरीजों को राहत: पीजीआई में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा को लेकर उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र मरीजों का किडनी प्रत्यारोपण मुफ्त किया जा रहा है। गंभीर बीमारी पहले ही परिवार की आर्थिक स्थिति पर भारी असर डालती है। ऐसे में सरकारी योजना के माध्यम से मुफ्त ट्रांसप्लांट गरीब मरीजों के लिए बड़ी राहत है। उन्होंने कैंसर की दवाओं की कीमतों पर सरकार की ओर से की गई सीमा निर्धारण की पहल को भी मरीजों के हित में महत्वपूर्ण बताया।