समर न्यूज। चंडीगढ़
पंजाब विधानसभा के छह दिवसीय सत्र की शुरुआत वीरवार को दिवंगत हस्तियों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। मानसा में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा और संगरूर में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले आठ ग्रामीण रोजगार मजदूरों सहित अन्य दिवंगत लोगों को याद किया गया। श्रद्धांजलि और दो मिनट का मौन रखने के बाद सदन की कार्यवाही शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। पहले दिन सदन की बैठक करीब नौ मिनट छह सेकेंड चली।
सत्र शुरू होने से पहले ही विधानसभा के बाहर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और झोटा के परिवार से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन कर नशे के कारोबार और इसके खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लेकर वहां से हटाया। पंजाब भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से पीड़ित परिवार से मिलने और न्याय सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार जब मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप सकती है तो परिवार से मुलाकात करने में क्या बाधा है। झोटा की हत्या को लेकर पंजाब की राजनीति में पहले से ही तनाव बना हुआ है। मानसा में 13 अक्टूबर को एक मेडिकल स्टोर पर गोलीबारी में उनकी मौत हो गई थी। वह कथित तौर पर प्रतिबंधित और नशीली दवाओं की अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। उनके परिवार ने पंजाब पुलिस की जांच पर असंतोष जताते हुए केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की थी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने परिवार की मांग स्वीकार करते हुए मामला सीबीआई को सौंपने की घोषणा की थी।
विपक्ष के निशाने पर कानून-व्यवस्था
कांग्रेस ने भी नशा तस्करी, गैंगस्टर गतिविधियों और राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को सत्र में प्रमुखता से उठाने के संकेत दिए हैं। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा पहले ही सरकार को इन मुद्दों पर घेरने की बात कह चुके हैं। विपक्ष का आरोप है कि नशे के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने में सरकार नाकाम रही है और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल हैं। कांग्रेस सदन में सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग कर सकती है। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी विपक्ष के आरोपों का जवाब नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान और पिछली सरकारों के कार्यकाल का हवाला देकर देने की तैयारी में है। पार्टी पहले भी अकाली दल-भाजपा और कांग्रेस की सरकारों पर नशे की समस्या को बढ़ने देने के आरोप लगाती रही है। केंद्र सरकार और सीमापार से होने वाली तस्करी रोकने की जिम्मेदारी को लेकर भी राजनीतिक बहस होने की संभावना है।
संगरूर हादसे के पीड़ितों को भी याद किया
सदन में संगरूर जिले के अलीशेर गांव के पास सड़क हादसे में मारे गए आठ मजदूरों को भी श्रद्धांजलि दी गई। तेज रफ्तार कार की चपेट में आने से आठ लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। हादसे के बाद पीड़ित परिवारों ने मुआवजे, सरकारी सहायता और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है। इस घटना ने सड़क पर काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सहायता की उपलब्धता पर भी सवाल खड़े किए हैं।
अगले दिनों में बढ़ेगी सियासी गर्मी
विधानसभा का घोषित कार्यक्रम 27 अक्टूबर तक है। शुक्रवार को सरकारी कामकाज प्रस्तावित है, जबकि सप्ताहांत और 26 अक्टूबर की राजपत्रित छुट्टी के बाद सदन 27 अक्टूबर को फिर बैठेगा। नशे, कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, किसानों और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर बहस की संभावना है। पहले दिन की संक्षिप्त कार्यवाही के बाद अब निगाह इस बात पर है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष इन मुद्दों पर सदन में कितनी चर्चा कराते हैं और क्या किसी ठोस कदम पर सहमति बन पाती है।