25 अक्टूबर को लुधियाना में अगली रणनीति बनाएंगे कर्मचारी संगठन
समर न्यूज | चंडीगढ़
पंजाब में सरकारी कर्मचारियों की दो दिवसीय हड़ताल के बीच राज्य सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव बढ़ गया है। बुधवार देर शाम मुख्य सचिव के साथ कर्मचारी नेताओं की बैठक बेनतीजा रही।
मांगों पर सहमति नहीं बनने से नाराज कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और 22 अक्टूबर को भी आंदोलन जारी रखा। दूसरी ओर, सरकार ने बिना मंजूरी ड्यूटी से गैरहाजिर कर्मचारियों की सूची मांगी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और जिला उपायुक्तों को निर्देश दिया है कि 21 अक्टूबर को सक्षम अधिकारी से अवकाश मंजूर कराए बिना अनुपस्थित रहे कर्मचारियों का ब्योरा तैयार कर भेजा जाए।
विभाग के पत्र में ऐसे कर्मचारियों की पहचान कर जानकारी तत्काल उपलब्ध कराने को कहा गया है। हालांकि, निर्देश में किसी खास दंड का उल्लेख नहीं है। आगे की कार्रवाई संबंधित नियमों और तथ्यों के आधार पर हो सकती है। कर्मचारी संगठन महंगाई भत्ते के बकाये, छठे वेतन आयोग की विसंगतियां दूर करने, पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने और संविदा व आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने की मांग कर रहे हैं। उनकी अन्य मांगों में वेतन और सेवा संबंधी लंबित लाभ तथा भत्तों से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं। यूनियन नेताओं का आरोप है कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही। पुरानी पेंशन योजना सहित प्रमुख मुद्दों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलने से कर्मचारियों में नाराजगी बनी हुई है।
हड़ताल के दौरान चंडीगढ़ समेत विभिन्न जिलों में कर्मचारियों ने धरने दिए और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। लुधियाना में उपायुक्त कार्यालय सहित सरकारी दफ्तरों में काम प्रभावित होने की खबरें हैं। कुछ स्थानों पर पंजीकरण और नियमित प्रशासनिक सेवाओं में भी बाधा आई। बिजली विभाग के कर्मचारियों और शिक्षकों सहित विभिन्न संगठनों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया। हड़ताल के असर से आम लोगों को सरकारी सेवाएं हासिल करने में परेशानी हुई, हालांकि पूरे राज्य में सेवाओं पर पड़े प्रभाव का एक समान आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं। सांझी तालमेल कमेटी की अगली बैठक 25 अक्टूबर को लुधियाना में बुलाने की बात कही गई है। इसमें मांगों पर सरकार के रुख और आंदोलन के अगले चरण पर चर्चा होगी।