सोलन-:दीपावली के त्यौहार के मद्देनजर जिला प्रशासन सोलन ने जन सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पटाखों की बिक्री, भंडारण और उपयोग को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिला दण्डाधिकारी मनमोहन शर्मा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए ये आदेश जारी किए हैं। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं और 10 नवम्बर, 2026 तक प्रभावी रहेंगे।
जारी आदेशों के अनुसार नगर निगम सोलन के लोअर बाजार, चौक बाजार, अपर बाजार, लक्कड़ बाजार, गंज बाजार, माल रोड और पुराने बस अड्डे के क्षेत्रों में पटाखों के भंडारण, बिक्री और प्रदर्शन पर प्रतिबंध रहेगा। इसके अतिरिक्त दोहरी दीवार ओवरब्रिज पर भी पटाखों की बिक्री के लिए स्टॉल लगाने की अनुमति नहीं होगी। नगर निगम सोलन इस स्थान पर कोई स्टॉल आवंटित नहीं करेगा। आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी उपमंडलाधिकारी सोलन को सौंपी गई है।
इन स्थानों पर होगी पटाखों की बिक्री
प्रशासन ने पटाखों की खुदरा बिक्री के लिए नगर निगम क्षेत्र में पांच स्थान निर्धारित किए हैं। इनमें ठोडो मैदान, बाईपास पर सब्जी मंडी के सामने खुला स्थान, एलआईसी कार्यालय की ओर बड़ोग बाईपास मार्ग के शुरुआती बिंदु के समीप खुला स्थान, चंबाघाट में वर्षा शालिका के पास तथा ब्रूरी में मोहन मीकिन फैक्ट्री के गेट के सामने का खुला स्थान शामिल है। इन निर्धारित स्थलों पर ही नियमानुसार पटाखों की बिक्री की जा सकेगी।
पटाखों की बिक्री के लिए अस्थायी लाइसेंस अथवा परमिट विस्फोटक नियम, 2008 और संबंधित सुरक्षा निर्देशों के अनुरूप जारी किए जाएंगे। स्टॉल नगर निगम द्वारा उपमंडलाधिकारी और स्थानीय पुलिस के परामर्श से ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर आवंटित किए जाएंगे। बिक्री और भंडारण की अनुमति केवल सक्षम प्राधिकरण से वैध स्थायी या अस्थायी लाइसेंस प्राप्त व्यक्तियों को होगी।
रात 8 से 10 बजे तक ही चला सकेंगे पटाखे
आदेशों के तहत रॉकेट और उड़ने वाले पटाखों के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। साइलेंस जोन, बाजारों, सरकारी कार्यालयों एवं भवनों, पेट्रोल पंपों, रसोई गैस संयंत्रों तथा विरासत भवनों और आवासों के समीप पटाखे चलाने पर भी रोक रहेगी।प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केवल पर्यावरण हितैषी पटाखों के उपयोग की अनुमति होगी। दीपावली की रात पटाखे चलाने का समय रात 8 बजे से 10 बजे तक निर्धारित किया गया है। ध्वनि प्रदूषण (नियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के साथ सर्वोच्च न्यायालय, राष्ट्रीय हरित अधिकरण और राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।