Summer express, न्याला। सूडान के दक्षिण दारफुर क्षेत्र के न्याला शहर में एक व्यस्त बाजार पर हुए भीषण ड्रोन हमले में कम से कम 102 लोगों की मौत हो गई, जबकि 113 अन्य घायल हो गए। मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, सोमवार शाम दुमाया इलाके के तानकोंग बाजार को निशाना बनाया गया। घटना के समय बाजार में बड़ी संख्या में आम नागरिक खरीदारी और नाश्ता करने पहुंचे थे। हमले के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और घायलों को अस्पतालों में पहुंचाया गया।
मानवाधिकार संगठन इमरजेंसी लॉयर्स ने इस हमले के लिए सूडानी सेना को जिम्मेदार ठहराया है और घटना की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। दारफुर विक्टिम्स ऑर्गनाइजेशन के कार्यकारी निदेशक एडम मूसा ओबामा के मुताबिक, प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सेना से जुड़े ड्रोनों ने उस समय बाजार पर हमला किया, जब वहां आम नागरिक मौजूद थे। हालांकि, हमले की जिम्मेदारी और परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आरएसएफ से जुड़े तासिस प्रशासन के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. अला अल-दीन नुगुद ने बताया कि हमले में 102 नागरिकों की जान गई और 113 लोग घायल हुए हैं। उनके अनुसार, घटना के तुरंत बाद चिकित्सा दल को मौके पर भेजा गया और अस्पतालों तथा स्वास्थ्य केंद्रों को सतर्क कर दिया गया, ताकि घायलों को समय पर उपचार मिल सके।
अस्पतालों में घायलों की भारी संख्या, महिलाओं और बच्चों की भी मौत
अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा संगठन डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (एमएसएफ) ने बताया कि न्याला स्थित उसके अस्पताल में 36 शव लाए गए, जबकि आपातकालीन विभाग में बड़ी संख्या में घायलों का उपचार किया गया। दारफुर विक्टिम्स ऑर्गनाइजेशन ने भी नागरिकों की मौतों का दस्तावेजीकरण किया है। शुरुआती रिपोर्टों में महिलाओं और बच्चों के भी हताहत होने की जानकारी सामने आई है। हमले के बाद स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है।
गृहयुद्ध के बीच ड्रोन हमलों से बढ़ा नागरिकों पर खतरा
सूडान में अप्रैल 2023 से सूडानी सशस्त्र बलों और अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) के बीच संघर्ष जारी है। राजधानी खारतूम से शुरू हुआ यह युद्ध धीरे-धीरे देश के कई हिस्सों में फैल गया। संघर्ष के दौरान दोनों पक्षों की ओर से विस्फोटक ले जाने वाले ड्रोनों के इस्तेमाल ने आम लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
संयुक्त राष्ट्र ने सूडान में जारी संघर्ष को गंभीर मानवीय संकट का कारण बताया है। हमलों में अस्पतालों, स्कूलों, बाजारों और विस्थापित लोगों के शिविरों जैसे नागरिक ठिकानों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आती रही हैं। लंबे समय से जारी हिंसा के कारण हजारों लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक, सूडान में लगभग 3.4 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत है।