Summer express, जींद। हरियाणा सरकार की खेल नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करने और प्रोत्साहित करने के दावों के बीच एशियन गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता तीरंदाज कीर्ति शर्मा का मामला चर्चा में है। जींद जिले के गांव रिटोली की रहने वाली कीर्ति शर्मा को गोल्ड मेडल जीतने के बावजूद अब तक 3 करोड़ रुपये की नकद पुरस्कार राशि का ऑफर लेटर नहीं मिला है। हैरानी की बात यह है कि भिवानी में आयोजित प्रदेश स्तरीय सम्मान समारोह के दौरान उन्हें स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों के बजाय सामान्य प्रतिभागियों की कतार में खड़ा कर दिया गया था।
इस मामले के सामने आने के बाद खेल विभाग में हलचल मच गई। विभागीय अधिकारियों ने इसे लिपिकीय स्तर पर हुई गलती बताया है। जिला खेल अधिकारी रामपाल हुड्डा स्वयं कीर्ति का कैश अवॉर्ड संबंधी ऑफर लेटर लेने पंचकूला स्थित खेल विभाग के मुख्यालय पहुंचे थे। हालांकि, उस समय विभाग के निदेशक कार्यालय में मौजूद नहीं थे। ऐसे में उन्हें जल्द कार्रवाई का आश्वासन देकर वापस लौटना पड़ा।
कीर्ति शर्मा ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी और पीड़ा जाहिर की थी। मामला खेल मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा तक भी पहुंचा। इसके बाद खेल मंत्री ने कीर्ति से फोन पर बातचीत की और उन्हें जल्द उचित सम्मान दिलाने का भरोसा दिया। साथ ही उन्होंने इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात भी कही।
दरअसल, प्रदेश स्तरीय सम्मान समारोह के दौरान कीर्ति शर्मा को उनकी उपलब्धि के अनुरूप 3 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि मिलने के बजाय केवल 7.5 लाख रुपये दिए जाने का मामला सामने आया था। इसके बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि खेल विभाग जल्द ही इस गलती को ठीक कर पुरस्कार राशि से संबंधित प्रक्रिया पूरी करेगा, लेकिन अभी तक ऑफर लेटर जारी नहीं होने के कारण मामला लंबित है।
एशियन गेम्स में जींद जिले के चार खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए कुल सात पदक हासिल किए थे। इनमें गांव संगतपुरा की निशानेबाज नीरू ढांडा ने दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता था। गांव रिटोली की तीरंदाज कीर्ति शर्मा ने स्वर्ण पदक हासिल किया। वहीं, कबड्डी खिलाड़ी पूजा हथवाला ने भी स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। इसके अलावा गांव डाहौला के हिमांशु ढिल्लों ने शूटिंग में दो रजत पदक अपने नाम किए थे।
कीर्ति शर्मा का अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का सफर भी संघर्ष और आर्थिक चुनौतियों से भरा रहा है। उन्होंने महज 15 वर्ष की उम्र में स्कूली शिक्षा के साथ तीरंदाजी का अभ्यास शुरू किया था। करीब 15 साल पहले पिल्लूखेड़ा के एक निजी स्कूल में उन्होंने इस खेल की शुरुआत की। उस समय स्कूल के पीटीआई, जो अब भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) में कोच हैं, ने उनके पिता विजय शर्मा को बेटी की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया था। इसके बाद पिता ने मात्र 5 हजार रुपये में उनके लिए पुराना धनुष खरीदा।
साल 2022 में साई के ट्रायल के दौरान बेहतर प्रदर्शन के लिए कीर्ति को नए धनुष की जरूरत पड़ी। आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद उनके पिता ने 60 हजार रुपये का कर्ज लेकर बेटी को नया धनुष दिलाया। इसी उपकरण और लगातार अभ्यास के साथ कीर्ति ने अपनी मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई और एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।
खेल उपलब्धियों के साथ कीर्ति ने अपने करियर में एक और मुकाम हासिल किया है। करीब दो महीने पहले उन्हें सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में कांस्टेबल के पद पर नियुक्ति मिली। इसके साथ ही वह पानीपत जिले के गांव अहर-कुराना स्थित कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष की पढ़ाई भी कर रही हैं।
जिला खेल अधिकारी रामपाल हुड्डा ने कहा कि कीर्ति शर्मा ने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक हासिल किया है। हरियाणा सरकार की खेल नीति के अनुसार उन्हें 3 करोड़ रुपये की नकद पुरस्कार राशि मिलनी चाहिए। यह राशि उनका अधिकार है और विभाग की ओर से जल्द ही उन्हें कैश अवॉर्ड का ऑफर लेटर दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लिपिकीय गलती के कारण यह स्थिति पैदा हुई है और जल्द इसका समाधान कर दिया जाएगा।
अब खेल विभाग की ओर से कीर्ति शर्मा को ऑफर लेटर जारी करने और पुरस्कार राशि से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने का इंतजार है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली खिलाड़ी को उसका निर्धारित सम्मान और आर्थिक पुरस्कार कब मिलेगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।