Summer express, नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण ने गंभीर रूप धारण कर लिया है। गुरुवार सुबह दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 482 दर्ज किया गया, जो खतरनाक स्तर पर पहुंचने का संकेत है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, राजधानी के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में बनी हुई है।
CPCB के मुताबिक, दिल्ली के सात निगरानी केंद्रों पर AQI 400 से अधिक दर्ज किया गया। पंजाबी बाग में सबसे अधिक 446 AQI रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा नरेला में 434, रोहिणी में 431, आरके पुरम में 416, बवाना में 412, दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में 408 और पटपड़गंज में 405 AQI दर्ज किया गया। इन सभी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में रही।
राजधानी के अन्य इलाकों में भी प्रदूषण का स्तर बेहद खराब स्थिति में पहुंचा हुआ है। ओखला फेज-2 और इंडिया गेट में AQI 399 दर्ज किया गया, जबकि आईटीओ में 397 और द्वारका सेक्टर-8 में 396 रहा। चांदनी चौक में वायु गुणवत्ता सूचकांक 356 और वसुंधरा एन्क्लेव में 330 दर्ज किया गया। वहीं, आनंद विहार में AQI 293 और मौसम विभाग के लोधी रोड केंद्र पर 268 रिकॉर्ड किया गया, जो खराब श्रेणी में आते हैं।
दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर स्थिति के बीच केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) मौसम संबंधी परिस्थितियों पर लगातार नजर रख रहा है। इसमें हवा की दिशा और गति सहित अन्य मौसमी कारकों का आकलन किया जा रहा है। मंत्री के अनुसार, इन जानकारियों के आधार पर प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
यादव ने यह भी कहा कि पिछले वर्षों की तुलना में पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है। सरकार के अनुसार, इस बार धान की करीब 40 प्रतिशत पराली का इस्तेमाल खेतों से बाहर प्रबंधन (एक्स-सीटू मैनेजमेंट) के तहत किया गया है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं में कमी के सवाल पर भी उन्होंने इसी आंकड़े का हवाला दिया।
हालांकि, पराली जलाने की घटनाओं में गिरावट के बावजूद दिल्ली की हवा की गुणवत्ता गंभीर बनी हुई है। ऐसे में प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए मौसम की स्थिति और प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।