Summer express, चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में भर्ती गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं को अब इलाज के दौरान अपनी मां से अलग नहीं रहना पड़ेगा। राज्य सरकार नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल और उपचार व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदेश की सभी विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयों (SNCU) को मातृ-नवजात शिशु देखभाल इकाइयों (MNCU) में तब्दील करने की तैयारी कर रही है। इस नई व्यवस्था के तहत इलाज के दौरान मां को बच्चे के पास 24 घंटे रहने की सुविधा मिलेगी। साथ ही स्तनपान और नवजात की शुरुआती देखभाल में परिवार की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने इस योजना की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश की नवजात देखभाल व्यवस्था को परिवार-केंद्रित बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य गंभीर रूप से बीमार, समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले बच्चों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ मां और बच्चे के बीच संपर्क बनाए रखना है।
यह पहल विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के ‘जीरो सेपरेशन’ मॉडल पर आधारित है। इसके तहत चिकित्सकीय स्थिति अनुकूल होने पर समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले शिशुओं को उनकी मां के पास रखा जाएगा। इससे इलाज के दौरान मां और बच्चे को अनावश्यक रूप से अलग नहीं रहना पड़ेगा। नई व्यवस्था में मां की मौजूदगी को उपचार प्रक्रिया का अहम हिस्सा बनाया जाएगा।
इस मॉडल में कंगारू मदर केयर (KMC) को भी विशेष महत्व दिया जाएगा। इसके तहत मां बच्चे को अपने सीने से लगाकर रखती है, जिससे दोनों के बीच त्वचा से त्वचा का संपर्क बना रहता है। इस प्रक्रिया से नवजात के शरीर का तापमान नियंत्रित रखने, स्तनपान को बढ़ावा देने और बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार लाने में मदद मिलती है। इसके अलावा मां और शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत होता है।
नवजात शिशुओं को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग चिकित्सा उपकरणों की संख्या भी बढ़ा रहा है। डॉ. सुमिता मिश्रा के अनुसार, प्रदेश की 29 विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयों में फिलहाल 54 वेंटिलेटर चालू हालत में उपलब्ध हैं। गंभीर रूप से बीमार बच्चों को सांस लेने में सहायता देने के लिए करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से 19 नए वेंटिलेटर खरीदे जा रहे हैं। इससे जरूरतमंद नवजात शिशुओं को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य विभाग की योजना प्रदेश की सभी 29 एसएनसीयू को फैमिली सेंटर्ड केयर मॉडल के तहत विकसित करने की है। इस व्यवस्था में केवल डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मचारियों की भूमिका ही महत्वपूर्ण नहीं होगी, बल्कि बच्चे की देखभाल में माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, इस आधुनिक स्वास्थ्य मॉडल की शुरुआत हरियाणा में सबसे पहले अंबाला और कुरुक्षेत्र से की गई थी। अंबाला सिटी में देश की पहली जिला स्तरीय मातृ-नवजात शिशु देखभाल इकाई स्थापित की गई थी। इसके बाद कुरुक्षेत्र में भी इसी तरह की सुविधा शुरू की गई। दोनों जिलों में इस व्यवस्था के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद अब इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की योजना बनाई गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को 1 नवंबर 2026 तक प्रदेश की एसएनसीयू को एमएनसीयू में अपग्रेड करने के निर्देश दिए थे। इस दिशा में काम तेजी से किया जा रहा है। योजना पूरी होने के बाद सरकारी अस्पतालों में भर्ती नवजात शिशुओं को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ मां की निरंतर देखभाल और परिवार का सहयोग भी मिल सकेगा। इससे नवजात शिशुओं के उपचार और शुरुआती विकास को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।