मंडी के मच्छियाल स्थित राष्ट्रीय माहशीर फार्म में हुआ उत्पादन, सफल परीक्षण के बाद दूसरे चरण में भेजी जाएंगी 10 हजार मछलियां
Summer express/बिलासपुर, सुभाष-: हिमाचल प्रदेश की राज्य मछली गोल्डन माहशीर अब प्रदेश की सीमाओं से बाहर भी अपनी पहचान बनाएगी। मत्स्य विभाग ने इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए पहली बार गोल्डन माहशीर की 2 हजार फिंगरलिंग्स (मत्स्य बीज अंगुलिकाएं) पश्चिम बंगाल भेजी हैं। इससे हिमाचल के मत्स्य पालन क्षेत्र को नई पहचान मिलने के साथ-साथ व्यावसायिक गतिविधियों और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।इन फिंगरलिंग्स का उत्पादन मंडी जिले के मच्छियाल स्थित राष्ट्रीय माहशीर फार्म में किया गया है। विभाग की ओर से भेजी गई खेप के माध्यम से पश्चिम बंगाल में इस प्रजाति के पालन और संवर्धन की संभावनाओं का परीक्षण किया जाएगा। यदि पहला चरण सफल रहता है तो विभाग दूसरे चरण में 10 हजार गोल्डन माहशीर फिंगरलिंग्स भेजने की तैयारी कर रहा है।
गौरतलब है कि गोल्डन माहशीर अपने आकर्षक सुनहरे रंग, मजबूती और विशिष्ट विशेषताओं के लिए जानी जाती है। यह हिमालयी नदियों और जलाशयों की महत्वपूर्ण प्रजाति होने के साथ-साथ जलीय पारिस्थितिकी के संतुलन में भी अहम भूमिका निभाती है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की रेड लिस्ट में इसे लुप्तप्राय प्रजातियों में शामिल किया गया है। ऐसे में इसका वैज्ञानिक प्रजनन और संरक्षण बेहद जरूरी है।हिमाचल के पोंग और गोबिंद सागर जलाशयों में भी गोल्डन माहशीर पाई जाती है। यह स्थानीय मछुआरा समुदायों की आजीविका से भी जुड़ी हुई है। पश्चिम बंगाल में इसकी खेप भेजना हिमाचल के वैज्ञानिक मत्स्य प्रजनन प्रयासों की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।