Summer express/मनमिंदर अरोड़ा | कुल्लू-:जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति का पारंपरिक उत्पाद सीबकथॉर्न अब देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। छरमा जूस के नाम से मशहूर इस उत्पाद की बढ़ती लोकप्रियता का असर अब इसकी कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है। पिछले साल तक जिस सीबकथॉर्न जूस की एक लीटर पैकिंग 700 से 800 रुपये में उपलब्ध थी, उसकी कीमत इस वर्ष बढ़कर 1500 से 2000 रुपये तक पहुंच गई है। खास बात यह है कि कीमतों में लगभग दोगुनी वृद्धि के बावजूद लोगों में इसकी खरीदारी को लेकर उत्साह कम नहीं हुआ है। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में भी सीबकथॉर्न उत्पादों की खूब मांग देखने को मिल रही है।
सीबकथॉर्न को जीआई टैग मिलने के बाद इसकी पहचान और लोकप्रियता में भी इजाफा हुआ है। इसका लाभ सीधे तौर पर स्थानीय उत्पादकों और स्वयं सहायता समूहों को मिल रहा है। लाहौल-स्पीति के कई क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगने वाले इस पौधे को अब लोग अपने खेतों में भी विकसित करने लगे हैं। इससे विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को बेहतर बाजार और कीमत मिलने से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
दशहरा मेले में अलग-अलग पैकिंग में उपलब्ध जूस
कुल्लू के ढालपुर मैदान में नाबार्ड के सहयोग से स्वयं सहायता समूहों को स्टॉल उपलब्ध करवाए गए हैं। इन स्टॉलों पर महिला मंडलों और अन्य समूहों की ओर से तैयार स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित और बिक्री के लिए रखा गया है। इनमें सीबकथॉर्न जूस लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मेले में एक लीटर जूस की बोतल 1500 से 2000 रुपये, आधा लीटर की पैकिंग 600 से 900 रुपये और 250 मिलीलीटर की पैकिंग 500 से 600 रुपये तक बेची जा रही है। इसके अलावा सीबकथॉर्न के सूखे फल और पत्तियां भी पैकिंग में उपलब्ध हैं। सूखे फलों से चाय तैयार की जा सकती है, जबकि 50 ग्राम पत्तियों की पैकिंग 100 रुपये में बेची जा रही है।
जूस की बिक्री में रोजाना हो रहा इजाफा
ढालपुर में नाबार्ड के सहयोग से स्टॉल लगाने वाले टेक सिंह ठाकुर ने बताया कि इस वर्ष सीबकथॉर्न जूस की मांग काफी अधिक है। वह प्रतिदिन करीब 20 से 25 लीटर तक जूस बेच रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साल की तुलना में इस बार जूस के दाम बढ़े हैं, लेकिन इसके बावजूद ग्राहक इसे खरीदने में काफी रुचि दिखा रहे हैं। लोग स्टॉल पर पहुंचकर इसके बारे में जानकारी ले रहे हैं और इसकी खरीदारी भी कर रहे हैं।
स्पीति से पहुंचे उत्पादक, सूखे फलों और पत्तियों की भी मांग
स्पीति घाटी से दशहरा उत्सव में स्टॉल लगाने पहुंचे किशन नेगी ने बताया कि सीबकथॉर्न जूस को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता है। ग्राहक स्वयं स्टॉल पर पहुंचकर इसकी विशेषताओं और उपयोग के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आधा लीटर जूस की पैकिंग 700 से 900 रुपये तक बेची जा रही है। जूस के अलावा सीबकथॉर्न के सूखे फल और पत्तियों को भी ग्राहक पसंद कर रहे हैं। इससे स्थानीय उत्पादों की बिक्री को अच्छा प्रोत्साहन मिल रहा है।
कॉस्मेटिक से लेकर हर्बल टी तक तैयार हो रहे उत्पाद
सीबकथॉर्न की बढ़ती मांग को देखते हुए इससे कई तरह के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। ढालपुर में लगे स्टॉलों पर इसके बीज से निकाला गया तेल, पल्प ऑयल, स्किन केयर ऑयल और मसाज ऑयल उपलब्ध हैं। इसके अलावा सीबकथॉर्न से साबुन, फेस क्रीम, फेस सीरम, लिप बाम और बॉडी लोशन जैसे सौंदर्य प्रसाधन भी बनाए जा रहे हैं। वहीं, न्यूट्रिशन पाउडर, कैप्सूल, सप्लीमेंट और हर्बल टी भी बाजार में उपलब्ध हैं। हालांकि, कुल्लू दशहरा उत्सव में मुख्य रूप से जूस, सूखे फल और चाय की पत्तियों की बिक्री पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
लद्दाख से भी दशहरा मेले में पहुंचा सीबकथॉर्न जूस
ढालपुर में स्टॉल लगाने पहुंचे संजय शर्मा ने बताया कि वह इस बार लद्दाख से सीबकथॉर्न जूस लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि जूस की गुणवत्ता अच्छी है और लोगों के बीच इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार कीमतों में वृद्धि हुई है। इसका एक प्रमुख कारण मांग के मुकाबले आपूर्ति कम होना भी है। उन्होंने बताया कि सीबकथॉर्न के फायदों और इसकी गुणवत्ता को देखते हुए लोग अधिक कीमत होने के बावजूद इसे खरीद रहे हैं।
महिलाओं की आर्थिकी को मिल रहा सहारा
सीबकथॉर्न की बढ़ती बाजार मांग लाहौल-स्पीति के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आर्थिक अवसर बनकर उभर रही है। प्राकृतिक रूप से उपलब्ध इस उत्पाद को प्रसंस्कृत कर जूस, चाय, तेल और अन्य सामग्री तैयार की जा रही है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है। कुल्लू दशहरा जैसे बड़े आयोजन इन उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचाने का बेहतर मंच साबित हो रहे हैं। यदि इसी तरह बाजार में मांग और उचित मूल्य मिलते रहे तो सीबकथॉर्न आने वाले समय में लाहौल-स्पीति की आर्थिकी को नई मजबूती देने वाला प्रमुख उत्पाद बन सकता है।