Summer express/शिमला, संजू- हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम यानी HRTC के पेंशनर्स को सरकार की ओर से 3 प्रतिशत महंगाई भत्ते की सौगात मिलने के बाद फिलहाल आंदोलन की राह पर ब्रेक लग गया है। लंबे समय से अपनी वित्तीय मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे पेंशनर्स ने 6 नवंबर को प्रस्तावित प्रदेशव्यापी धरने को स्थगित करने का फैसला लिया है। हालांकि, संगठन ने साफ कर दिया है कि यह आंदोलन की समाप्ति नहीं, बल्कि सरकार को अपनी मांगें पूरी करने के लिए दिया गया समय है। पेंशनर्स की मांग है कि शेष 5 प्रतिशत डीए, पेंशन रिवीजन एरियर और अन्य लंबित वित्तीय देनदारियों का भी जल्द भुगतान किया जाए। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने बाकी मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई और पेंशनर्स के साथ भेदभाव जारी रहा, तो आने वाले समय में आंदोलन फिर से तेज किया जाएगा।
HRTC पेंशनर्स के आंदोलन के बीच सरकार की ओर से 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता जारी करने के निर्देश मिलने के बाद संयुक्त संघर्ष समिति HRTC पेंशनर कल्याण संगठन ने फिलहाल अपने आंदोलन को स्थगित कर दिया है। संगठन के महासचिव राजेंद्र ठाकुर ने बताया कि पेंशनर्स अपनी मांगों को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे थे और 6 नवंबर को प्रदेशभर में धरना-प्रदर्शन करने की तैयारी थी। इसी बीच उप मुख्यमंत्री की ओर से 3 प्रतिशत डीए देने के निर्देश जारी किए गए, जिसके बाद संगठन ने धरना टालने का निर्णय लिया।राजेंद्र ठाकुर के मुताबिक, उप मुख्यमंत्री ने निगम अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद अपने फेसबुक पेज के माध्यम से HRTC पेंशनर्स को 3 प्रतिशत डीए देने की जानकारी साझा की थी। इसके बाद संगठन के प्रतिनिधियों ने निगम मुख्यालय पहुंचकर प्रबंध निदेशक और मुख्य लेखाधिकारी से इस संबंध में पुष्टि की। निगम प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि 3 प्रतिशत डीए जारी करने के आदेश दे दिए गए हैं। यह लाभ 1 अक्टूबर 2026 से पेंशन में जुड़कर मिलेगा और इसी महीने मिलने वाली पेंशन में इसका लाभ पेंशनर्स को मिलने की उम्मीद है। हालांकि, शेष 5 प्रतिशत डीए को लेकर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
संगठन ने मेडिकल अलाउंस का मामला भी निगम प्रबंधन के सामने उठाया। राजेंद्र ठाकुर ने बताया कि प्रदेश सरकार पहले ही मेडिकल अलाउंस के लिए 20 करोड़ रुपये जारी कर चुकी है, लेकिन कुछ यूनिट्स में 31 मार्च 2026 की कट-ऑफ डेट को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में संगठन ने मांग की है कि सभी डिपो में कट-ऑफ डेट एक समान रखी जाए, ताकि किसी भी पेंशनर को मेडिकल अलाउंस के लाभ से वंचित न रहना पड़े। इस मामले को दीपावली से पहले स्पष्ट करने का आश्वासन दिया गया है।इसके अलावा जुलाई 2025 के बाद सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों की पेंशन का मुद्दा भी उठाया गया। संगठन के अनुसार, ऐसे कई कर्मचारी अब तक पेंशन का इंतजार कर रहे हैं। प्रबंधन की ओर से आश्वासन दिया गया है कि जिन 40 सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने कम्यूटेशन नहीं लेने का विकल्प दिया है, उनकी पेंशन इसी महीने शुरू कर दी जाएगी।
वहीं, दीपावली से पहले कर्मचारियों के वेतन और पेंशन भुगतान को लेकर भी राहत की बात सामने आई है। संगठन को जानकारी दी गई है कि सरकार की ओर से कर्मचारियों के वेतन के लिए 38 करोड़ रुपये और पेंशन भुगतान के लिए 20 करोड़ रुपये की ग्रांट जारी की जा चुकी है। प्रबंधन ने आश्वासन दिया है कि यह राशि दीपावली से पहले कर्मचारियों और पेंशनर्स तक पहुंचा दी जाएगी।इन मुद्दों पर चर्चा के बाद संयुक्त संघर्ष समिति के सदस्यों ने बैठक कर आंदोलन की आगामी रणनीति पर विचार किया। संगठन ने 3 प्रतिशत डीए जारी करने के फैसले के लिए मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और निगम प्रबंधन का आभार जताया। साथ ही मांग की कि बाकी 5 प्रतिशत डीए को लेकर भी जल्द फैसला लिया जाए। संगठन का कहना है कि जब भी शेष डीए जारी किया जाए, तो कर्मचारियों और पेंशनर्स दोनों को एक साथ इसका लाभ मिलना चाहिए। पेंशनर्स के साथ किसी भी तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
राजेंद्र ठाकुर ने स्पष्ट किया कि त्योहारों के मद्देनजर फिलहाल 6 नवंबर का प्रस्तावित धरना स्थगित किया गया है, लेकिन संगठन अपनी बाकी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटा है। यदि शेष 5 प्रतिशत डीए देने में पेंशनर्स के साथ भेदभाव किया गया, तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।इसके साथ ही संगठन ने पेंशन रिवीजन एरियर का मामला भी प्रमुखता से उठाया। राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार के अन्य पेंशनर्स को पेंशन रिवीजन का एरियर काफी हद तक मिल चुका है। पिछली सरकारों के समय 50-50 हजार रुपये की किस्तें भी जारी की गई थीं, लेकिन HRTC के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अभी तक उनके पूरे वित्तीय लाभ नहीं मिले हैं। संगठन ने मांग की है कि HRTC पेंशनर्स को भी प्रदेश सरकार के अन्य पेंशनर्स की तर्ज पर सभी लंबित देनदारियां समान रूप से दी जाएं।फिलहाल 3 प्रतिशत डीए मिलने से पेंशनर्स को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन शेष मांगों को लेकर उनकी नजरें अब सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं।