Summer express, भिवानी। हरियाणा के चर्चित मनीषा मौत मामले में अदालत के फैसले के बाद एक बार फिर जांच का रास्ता खुल गया है। कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए मामले की नए सिरे से जांच करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले से मनीषा के परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद फिर से जगी है। मनीषा भिवानी जिले के गांव ढाणी लक्ष्मण की रहने वाली थी।
अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मनीषा के पिता संजय ने कहा कि परिवार लंबे समय से अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहा है। उनकी याचिका स्वीकार होने से उन्हें उम्मीद की नई किरण दिखाई दी है। उन्होंने मामले में परिवार की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता हर्षमोहन का भी आभार जताया।
संजय ने कहा कि परिवार की लड़ाई किसी सरकार या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि अपनी बेटी के साथ हुए कथित अन्याय के खिलाफ है। उन्होंने आशंका जताई कि पहले की तरह जांच से जुड़े अधिकारियों को बदला जा सकता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि मामले में न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित नहीं होनी चाहिए। परिवार ने यह भी कहा कि नई जांच में शामिल अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नजर रखी जाएगी और जांच से जुड़ी हर जानकारी व रिपोर्ट उन्हें उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि मामले की वास्तविकता सामने आ सके।
मनीषा के पिता ने शुरुआत से ही बेटी की मौत को हत्या बताया है। उनका दावा है कि दिल्ली एम्स की मेडिकल रिपोर्ट में जहर खाने की पुष्टि नहीं हुई थी, जबकि रिपोर्ट में गर्दन काटे जाने का उल्लेख था। उन्होंने यह भी दावा किया कि मनीषा के शरीर पर कुत्तों के काटने के निशान नहीं थे और घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट भी बरामद नहीं हुआ था। परिवार का आरोप है कि इन पहलुओं की समुचित जांच किए बिना ही मौत को आत्महत्या मान लिया गया था। हालांकि, पुलिस और सीबीआई की जांच में इसे आत्महत्या बताया गया था। अब अदालत के आदेश के बाद इन सभी बिंदुओं की दोबारा जांच अहम होगी।
मनीषा 11 अगस्त 2025 को अपने गांव ढाणी लक्ष्मण से प्ले स्कूल में ड्यूटी के लिए निकली थी। इसके बाद उसने नर्सिंग कॉलेज में दाखिले के सिलसिले में जाने की बात कही थी, लेकिन वह घर वापस नहीं लौटी। दो दिन बाद 13 अगस्त को उसका शव सिंघानी गांव के खेतों में मिला था। बेटी की मौत के बाद परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस में शिकायत दी और न्याय की मांग को लेकर ग्रामीणों के साथ धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
शुरुआत में पुलिस ने 18 अगस्त 2025 को मनीषा की मौत को आत्महत्या बताया था। इस निष्कर्ष के बाद परिवार और ग्रामीणों ने विरोध जताया तथा मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी। परिजनों की मांग पर दिल्ली एम्स में मनीषा का तीसरी बार पोस्टमार्टम कराया गया। लगातार विरोध और आंदोलन के बीच 26 अगस्त 2025 को मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी।
करीब एक साल तक जांच करने के बाद सीबीआई ने अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। हालांकि, अब कोर्ट ने इस रिपोर्ट को स्वीकार करने से इनकार करते हुए दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। मनीषा के परिवार ने कहा है कि न्याय मिलने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उनकी मांग है कि मौत से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि हत्या की पुष्टि होती है तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।