7 July, 2025
7 जुलाई, 2025 को आषाढ़ शुक्ल द्वादशी के दिन वासुदेव द्वादशी का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह तिथि भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को समर्पित है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत एवं पूजा करने से सभी पाप नष्ट होते हैं, संतान सुख की प्राप्ति होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
व्रत का धार्मिक महत्व
पुराणों के अनुसार, इस व्रत की महिमा महर्षि नारद ने माता देवकी को बताई थी। वासुदेव द्वादशी, देवशयनी एकादशी के अगले दिन आती है और इस बार यह सोमवार को पड़ रही है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है।
- सूर्योदय: सुबह 5:29 बजे
- सूर्यास्त: शाम 7:23 बजे
- राहुकाल: सुबह 7:14 से रात 8:58 तक (इस दौरान पूजा न करें)
- नक्षत्र: अनुराधा
- चंद्रमा: वृश्चिक राशि में
- पूजा विधि और नियम
- प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें
- भगवान वासुदेव व लक्ष्मीजी की प्रतिमा को गंगाजल व पंचामृत से स्नान कराएं
- चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मूर्तियों की स्थापना करें
- फूल, रोली, मौली, हल्दी, धूप-दीप और खीर या मिठाई का भोग अर्पित करें
- कनकधारा स्तोत्र और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें
- ब्राह्मण को दान देना विशेष पुण्यकारी होता है
- संतान प्राप्ति की कामना वालों के लिए विशेष व्रत
इस व्रत को करने से संतान की प्राप्ति, मनोकामना पूर्ति और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। विशेष रूप से जिन दंपत्तियों को संतान सुख की चाह है, उनके लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी माना गया है। चूंकि इस बार यह दिन सोमवार को पड़ रहा है, इसलिए भगवान शिव की पूजा भी अत्यंत फलदायक होगी।