चंडीगढ़ | पंजाब सरकार ने संभावित बाढ़ से निपटने के लिए व्यापक तैयारियों को अमल में ला दिया है। जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए पूरे राज्य में जारी बाढ़ प्रबंधन और नियंत्रण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निचले और बाढ़ संभावित इलाकों में सख्त निगरानी रखी जाए और कंट्रोल रूम को पूरी तरह सक्रिय अवस्था में रखा जाए।
बैठक के दौरान मंत्री को बताया गया कि सरकार ने बाढ़ नियंत्रण के तहत अब तक लगभग ₹230 करोड़ खर्च किए हैं। एसडीएमएफ, मनरेगा और विभागीय योजनाओं के तहत 599 परियोजनाएं पूरी की गई हैं, जिनमें 4,766 किलोमीटर लंबी ड्रेनों, नदियों और नालों की सफाई तथा तटबंधों की मजबूती शामिल है।
इसके अतिरिक्त, 1,044 चेक डैम और 3,957 सोख गड्ढों का निर्माण किया जा रहा है। वहीं, 53,400 बांस के पौधे और 294 किलोमीटर क्षेत्र में वेटीवर घास रोपित की जा चुकी है, जिससे मिट्टी कटाव और बाढ़ नियंत्रण में मदद मिलेगी।
आपात स्थिति से निपटने के लिए विभाग ने 7.79 लाख सैंड बैग खरीदे हैं, जिनमें से करीब 4 लाख पहले ही भरकर राज्यभर में रणनीतिक स्थानों पर रखे गए हैं। इस बार पहली बार ‘जंबो बैग’ भी खरीदे गए हैं, जो बाढ़ के दौरान तटबंधों में दरार भरने के लिए तुरंत इस्तेमाल किए जा सकेंगे।
मंत्री बरिंदर गोयल ने फील्ड अधिकारियों और इंजीनियरों से बातचीत कर नदियों व नालों में जल स्तर की स्थिति, ड्रेनों की सफाई और विभागीय कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी सतर्कता के साथ हालात पर नजर रखे हुए है और 2023 के अनुभवों से सीख लेकर इस बार पहले से बेहतर योजना बनाई गई है।
प्रमुख सचिव कृष्ण कुमार ने बताया कि ज़िला और सर्कल स्तर पर साप्ताहिक निगरानी बैठकें की जा रही हैं ताकि ज़मीनी स्तर पर कार्यों की गति बनी रहे। उन्होंने विभागीय कर्मियों की मेहनत की सराहना करते हुए आगामी मानसून सीजन में पूरी जिम्मेदारी से डटे रहने का आह्वान किया।
इस समीक्षा बैठक में मुख्य अभियंता (ड्रेनेज-कम-माइनिंग) हरदीप सिंह महिंदीरत्ता सहित जल संसाधन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।