Shimla,14 July
हिमाचल सेब उत्पादक संघ ने राज्य सरकार और हाईकोर्ट द्वारा किसानों की जमीन से की जा रही बेदखली कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज़ जताया है। संघ ने इसे न केवल अवैज्ञानिक और अमानवीय, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 का भी उल्लंघन बताया है। पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने आरोप लगाया है कि सरकार धारा 163-ए के नाम पर किसानों की वर्षों पुरानी बागवानी को उजाड़ रही है, जबकि कई मामलों पर अभी कोर्ट में सुनवाई चल रही है।
अदालत में चार कानूनी आधारों पर इस कार्रवाई को देंगे चुनौती
राकेश सिंघा ने बताया कि बीते एक साल में हिमाचल हाईकोर्ट ने भूमि से बेदखली को लेकर कई विरोधाभासी फैसले दिए हैं। वर्ष 2000 में सरकार ने खुद धारा 163-ए के अंतर्गत इन जमीनों को नियमित करने के लिए आवेदन मांगे थे, लेकिन अब उन्हीं जमीनों को वन भूमि बताकर किसानों को हटाया जा रहा है। संघ का कहना है कि यह किसानों के जीवन और आजीविका के अधिकार का हनन है।सेब उत्पादक संघ का यह भी कहना है कि वे अदालत में चार कानूनी आधारों पर इस कार्रवाई को चुनौती देंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सेब का पौधा “मेलस सिल्वेस्ट्रिस” प्रजाति से आता है, जो भले ही जंगलों से जुड़ा हो, लेकिन वर्तमान सेब बागवानी बीते पचास वर्षों से की जा रही है। इसलिए इसे वन प्रजाति बताकर बेदखली करना पूरी तरह अनुचित है।
मंगलवार को बुलाई महासभा
संघ ने मंगलवार को जुब्बल के हाटकोटी में किसानों की एक आपातकालीन महासभा बुलाई है, जिसमें आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। साथ ही सरकार से मांग की गई है कि जब तक सभी कानूनी पहलुओं पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए और अदालत में पुनर्विचार याचिका दायर की जाए।