Summer express, नई दिल्ली। भारत सरकार ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने और सरकारी बॉन्ड बाजार को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू किए गए आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 के तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को सरकारी बॉन्ड में निवेश से होने वाले पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) पर कर छूट प्रदान की जाएगी।
सरकार का मानना है कि इस कदम से भारतीय ऋण बाजार में विदेशी निवेश बढ़ेगा और वैश्विक निवेशकों के बीच भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों की आकर्षण क्षमता मजबूत होगी। साथ ही, इससे विदेशी पूंजी प्रवाह में वृद्धि होने और रुपये को स्थिरता मिलने की भी उम्मीद जताई जा रही है।
वर्तमान व्यवस्था के तहत विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) पर अर्जित पूंजीगत लाभ पर 12.5 प्रतिशत तक कैपिटल गेन टैक्स तथा कुछ मामलों में 20 प्रतिशत तक विदहोल्डिंग टैक्स का भुगतान करना पड़ता था। नए प्रावधान के लागू होने से यह कर बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा, जिससे निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि कर राहत से भारत का बॉन्ड बाजार अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा। इससे वैश्विक बॉन्ड इंडेक्स में भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों की हिस्सेदारी बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है, जो लंबे समय में विदेशी निवेश के नए अवसर पैदा करेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार इस फैसले का प्रभाव तुरंत दिखाई देने की बजाय मध्यम अवधि में सामने आएगा। हालांकि, यह कदम निवेशकों के विश्वास को मजबूत करने और भारतीय वित्तीय बाजारों में वैश्विक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
सरकार की यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत वैश्विक निवेशकों के लिए खुद को एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि कर संबंधी राहत और निवेश-अनुकूल नीतियां देश में विदेशी पूंजी आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।