Summer express, लंदन। ब्रिटेन में भारतीय मूल की एक महिला ने 24 वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद अपने पूर्व पति के खिलाफ बड़ी जीत हासिल की है। अदालत ने पूर्व पति द्वारा संपत्तियां छिपाने और वित्तीय जानकारी गलत तरीके से प्रस्तुत करने को गंभीर मानते हुए महिला को 6.6 मिलियन पाउंड (करीब 85 करोड़ रुपये) का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस फैसले को ब्रिटेन के पारिवारिक कानून से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में से एक माना जा रहा है।
मामला भारतीय मूल की ब्रिटिश नागरिक Varsha Gohil और उनके पूर्व पति Bhadresh Gohil से जुड़ा है। वर्ष 2002 में वर्षा गोहिल ने अपने पति के कथित अनुचित व्यवहार और वैवाहिक विवादों के चलते तलाक की अर्जी दाखिल की थी। उस समय हुए वित्तीय समझौते के तहत उन्हें अपेक्षाकृत कम राशि और एक पुरानी कार मिली थी। हालांकि वर्षा को शुरू से संदेह था कि उनके पति ने अपनी वास्तविक संपत्तियों और आय का पूरा विवरण अदालत के सामने नहीं रखा।
मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब भद्रेश गोहिल का नाम एक अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितता से जुड़े मामले में सामने आया। जांच एजेंसियों को पता चला कि वह करोड़ों पाउंड की संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा थे। बाद में उन्हें धोखाधड़ी, जालसाजी और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश के आरोपों में दोषी ठहराया गया और जेल की सजा सुनाई गई।
आपराधिक जांच के दौरान दुनिया भर में फैली उनकी कई संपत्तियां जब्त कर ली गईं। जांच में सामने आया कि इनमें से बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियां थीं जिनका तलाक की कार्यवाही के दौरान कोई खुलासा नहीं किया गया था। इन तथ्यों के सामने आने के बाद वर्षा गोहिल ने पुराने तलाक मामले को दोबारा खोलने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
मामला अंततः ब्रिटेन की सर्वोच्च अदालत तक पहुंचा, जहां अदालत ने माना कि यदि कोई जीवनसाथी जानबूझकर अपनी संपत्ति छिपाता है और अदालत को गुमराह करता है, तो उसे उस बेईमानी का लाभ नहीं मिल सकता। इसके बाद मामले की विस्तृत सुनवाई दोबारा शुरू हुई।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद हाई कोर्ट ने संपत्तियों की गहन जांच की और पाया कि लगभग 6.66 मिलियन पाउंड की संपत्ति वैध स्रोतों से अर्जित की गई थी तथा उसे वैवाहिक संपत्ति माना जा सकता है। अदालत ने यह पूरी राशि वर्षा गोहिल को देने का आदेश दिया।
फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने पूर्व पति के आचरण की कड़ी आलोचना की और कहा कि उन्होंने लगातार तथ्यों को छिपाने और अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया। अदालत ने यह भी माना कि यह मामला पारिवारिक कानून में पारदर्शिता और वित्तीय खुलासे के महत्व को रेखांकित करता है।
हाल ही में ब्रिटेन की अपीलीय अदालत ने भी स्पष्ट कर दिया कि इस फैसले के खिलाफ आगे कोई अपील स्वीकार नहीं की जाएगी। इसके साथ ही दो दशक से अधिक समय तक चली यह कानूनी लड़ाई वर्षा गोहिल के पक्ष में समाप्त हो गई।