Mandi, Dharamveer
मंडी जिला के गोहर उपमंडल के पंगल्यूर गांव में 30 जून की रात एक भयावह प्राकृतिक आपदा ने दो परिवारों के 9 लोगों को निगल लिया। सकोली खड्ड में अचानक आई भीषण बाढ़ ने दो घरों को अपने साथ बहा दिया, जिसमें 75 वर्षीय पदम देव, उनकी पत्नी देवकू देवी, और झाबे राम का परिवार शामिल था।
आपदा की रात बाढ़ में फंसे लोग लगातार फोन पर मदद की गुहार लगाते रहे। झाबे राम की बहू उमावती का अंतिम कॉल रात 1:55 बजे तक आया, जिसमें वह चिल्ला-चिल्लाकर कह रही थी कि वह अब नहीं बच पाएंगे। सामने ही लगभग 100 मीटर की दूरी पर परिजन और ग्रामीण मदद करने को तैयार थे, लेकिन बाढ़ की रफ्तार और पानी के स्तर ने सभी को बेबस बना दिया।
चश्मदीद की दर्दभरी कहानी
कुशमा देवी, जो आपदा की रात को इस पूरे हादसे की गवाह बनीं, ने बताया कि 1:35 बजे झाबे राम की बहू का कॉल आया था। पहले तो उन्हें यकीन नहीं हुआ, लेकिन जैसे ही उन्होंने बाहर देखा, सकोली खड्ड समंदर बन चुकी थी। 1:42 बजे फिर कॉल आया और उमावती बार-बार यही कह रही थी कि “आज हम नहीं बचने वाले।”
अब तक 4 शव बरामद, बाकी लापता
बाढ़ में बहने वालों में से अब तक केवल पार्वती देवी (झाबे राम की पत्नी), इंद्रदेव (बेटा) और कनिका (पोती) के शव मिल पाए हैं। बाकी 5 लोग लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है। इस हादसे में झाबे राम की बेटी हेमलता ही बच पाई, जो शादी के बाद गांव से बाहर रह रही थी।
ढांचा बहा, पुलिया टूटी, गांव टुकड़ों में बंटा
बाढ़ ने न केवल मकान, गौशालाएं और घराट बहा दिए, बल्कि पैदल चलने वाली पुलिया को भी तहस-नहस कर दिया है। गांव की आबादी खड्ड के आर-पार बसती है, और अब उन्हें खड्ड पार करने के लिए जोखिम उठाना पड़ रहा है। इससे पहले 2023 की आपदा में ज्यूणी खड्ड का पुल भी बह चुका था।
ग्रामीणों की मांग
प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से स्कोली खड्ड पर मजबूत पैदल पुलिया और ज्यूणी खड्ड पर पक्का पुल बनाने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।
- कुशमा देवी (चश्मदीद ग्रामीण): “हमने उन्हें फोन पर चिल्लाते हुए सुना, लेकिन कुछ कर नहीं पाए। पानी सामने समंदर जैसा बह रहा था।”
- धमेश्वर (आपदा प्रभावित, झाबे राम के बड़े भाई): “मैं काजा में काम पर था। फोन से कुशलक्षेम ले रहा था, पर सब खत्म हो गया। सबकुछ पानी में समा गया।”